माही टॉक फेस्ट में “राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष” पर प्रेरक संवाद
बांसवाड़ा,25 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में आत्मविश्लेषण और आत्मचिंतन के दौर से गुजर रहा है। संघ का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि समाज को बड़ा करने और व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र सेवा करना है।
यह विचार प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने तीन दिवसीय माही टॉक फेस्ट के अंतिम दिन “राष्ट्र सेवा/राष्ट्र साधना के 100 वर्ष” विषय पर आयोजित उद्बोधन एवं संवाद सत्र में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि संघ का कार्य मूलतः समाज कार्य है, जिसमें स्वयंसेवक राष्ट्र सेवक के रूप में संस्कारित होते हैं। मन से किया गया आत्मविश्लेषण यह दर्शाता है कि संघ ने बीते वर्षों में निरंतर प्रगति की है और सेवा व संवेदना के संस्कार समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचे हैं।
निम्बाराम ने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि संघ और समाज का एक होना ही उनका मूल लक्ष्य था। इसी दृष्टि से शिशु, विद्यार्थी, कॉलेज छात्र, व्यवसायी, तरुण और प्रौढ़—हर आयु वर्ग के लिए अलग-अलग शाखाओं का संचालन किया जाता है, जिससे संस्कार और संगठन की भावना निरंतर मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि इंडिया टुडे के एक सर्वे में संघ के सेवा कार्यों को देश का सबसे बड़ा एनजीओ माना गया है, जो स्वयंसेवकों के सतत सामाजिक योगदान का प्रमाण है। संघ शाखा चलाता है, परंतु स्वयंसेवक समाज से कभी अलग नहीं होता; वह हर परिस्थिति में व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण का कार्य करता है।
संवाद सत्र में क्षेत्र प्रचारक ने बताया कि संघ ने तीन प्रमुख शक्तियों—मातृ शक्ति, सज्जन शक्ति और सम्पूर्ण समाज के संगठन—पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। संघ को समझने के लिए संघ में आना आवश्यक है, और आने-जाने के दोनों द्वार सदैव खुले हैं। उन्होंने कहा, “जो हमसे टकराएगा, वह हमारे जैसा हो जाएगा,” जो संघ की समरसता और संवाद की कार्यशैली को दर्शाता है।
युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान ने केवल अधिकार ही नहीं, कर्तव्यों का बोध भी कराया है। सामाजिक सद्भाव के साथ आगे बढ़ना और स्वदेशी को स्वावलंबन आंदोलन के रूप में अपनाना आज की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में केवल उपदेश नहीं, बल्कि कर्म साधना का भाव निहित है।
अपने विचारों को और अधिक धार देते हुए उन्होंने कहा, “शक्तिहीन के सारे शस्त्र जग में ठुकरा दिए जाते हैं,” इसलिए समाज को संगठित और सशक्त बनाना आवश्यक है। वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत घरों तक स्वयंसेवकों की पहुँच हो चुकी है। संघ के विभिन्न सेवा प्रकल्पों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है तथा प्रत्येक प्रदेश का अपना जाग्रत पत्र भी है।
कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित इस संवाद सत्र में मॉडरेटर श्रीमती रुचि श्रीमाली रहीं, जबकि संचालन रणधीर व्यास ने किया। उपस्थित श्रोताओं ने प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया और राष्ट्र साधना के सौ वर्षों की यात्रा पर हुए इस विचारोत्तेजक संवाद को प्रेरणादायी बताया।
