उदयपुर, 02 अक्टूबर, 2026। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर द्वारा महापुरुष महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर महाविद्यालय के आईपीएम थिएटर में पुष्पांजलि अर्पित की गई। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह द्वारा उद्बोधन के दौरान अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस एवं गांधी जयंती के अवसर पर गांधीजी के विचारों तथा कृषि आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों, कृषि वैज्ञानिकों एवं शिक्षकों ने गांधीजी के सत्य-अहिंसा के संदेश तथा शास्त्रीजी के “जय जवान, जय किसान” के विचार को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 2 अक्टूबर केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि भारत के दो महान सपूतों के विचारों को स्मरण करने का अवसर है। गांधीजी ने देश को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने किसानों और जवानों के सम्मान को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखा।
कृषि के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा को याद करते हुए बताया गया कि 1960 के दशक में देश को खाद्यान्न के लिए विदेशी सहायता और आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। उस समय शास्त्रीजी ने किसानों का मनोबल बढ़ाया और कृषि उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया। इसके बाद कृषि मंत्री सी. सुब्रमण्यम, वैज्ञानिकों तथा डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन जैसे कृषि वैज्ञानिकों के प्रयासों और नॉर्मन बोरलॉग के सहयोग से देश में हरित क्रांति की नींव मजबूत हुई।
वक्ताओं ने कहा कि हरित क्रांति केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ भारतीय खाद्य निगम (FCI), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि मूल्य आयोग (CACP), भंडारण, परिवहन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं ने कृषि क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत किया। इसके परिणामस्वरूप भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना और आज बड़ी आबादी की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।
कार्यक्रम में वर्तमान कृषि चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज किसान को जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित मानसून, अत्यधिक गर्मी, गिरते भूजल स्तर, कीट एवं रोग तथा बढ़ती कृषि लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में छोटे एवं सीमांत किसानों को मजबूत करने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, उचित मूल्य, ऋण, बीमा, बाजार एवं भंडारण जैसी सुविधाओं की आवश्यकता है। कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा गया कि कृषि विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों की भूमिका केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। “लैब टू लैंड” की अवधारणा के तहत वैज्ञानिक तकनीकों को खेत तक पहुंचाना और किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है। साथ ही किसानों को नकली कृषि आदानों से बचाने तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सामग्री उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि किसान कृषि मूल्य श्रृंखला की पहली कड़ी है, इसलिए ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए जो किसान की आय, उत्पादन क्षमता और बाजार तक पहुंच को मजबूत करें। कृषि वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और कृषि विभाग से जुड़े सभी लोगों से किसान हित में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया गया। अंत में उपस्थितजनों ने गांधीजी के सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन और ग्राम स्वराज के विचारों तथा शास्त्रीजी के किसान-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन “किसान के लिए, गांव के लिए और राष्ट्र के लिए—श्रृंखला की हर कड़ी के रूप में मिलकर काम करने” के संकल्प के साथ हुआ।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. लोकेश गुप्ता द्वारा इस जयंती के अवसर पर युगपुरुष महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित करते हुए इन महापुरुषों द्वारा किए गए त्याग व बलिदान की याद को ताजा करते हुए उनके बताए गए सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने की अपील की।
बताया कि लाल बहादुर शास्त्रीजी ने देश में हरित क्रांति एवं श्वेत क्रांति की नींव रखी, जिससे आज हमारा देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन पाया है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. कपिल देव आमेटा ने इन महापुरुषों के बलिदान को याद करते हुए पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही एमडीएस स्कूल से पधारे विद्यार्थियों तथा महाविद्यालय के सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। महाविद्यालय द्वारा आयोजित महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर वरिष्ठ संकाय सदस्य, विभागाध्यक्ष, कर्मचारीगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
