– श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही रामकथा का तीसरा दिन
उदयपुर, 10 अप्रेल। सर्वेश्वर महादेव मंदिर, डोरे नगर, सेक्टर 3 में श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन श्री पुष्कर दास महाराज ने कहा बड़भागी होते हैं तो सत्संग में बैठते और मनुष्य जनम पाते है। हनुमान जी बड़भागी थे जिन्हें प्रभु राम की सेवा मिली, भजन सिर्फ मनुष्य जन्म में ही कर सकते है। आगे कहा धरती पर पाप ज्यादा बढ़ रहा है इसलिए प्रकृति भी रूठ रही है, आजकल नवजात बच्चों को बहुत दुख दिया जा रहा है । आज के समय में नवरात्रि में 9 कन्याएं भोजन करवाने के लिए मुश्किल से मिलती हैं, बच्चियों को बचाना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है । आगे भोले बाबा सती को लेकर अगस्त ऋषि के आश्रम में कथा श्रवण करने जाते है । भोले बाबा तो कथा को आदर देते हे परन्तु सती कथा को ध्यान से नहीं सुनती ओर प्रभु राम जी ओर सीता जी की परीक्षा करती है । परीक्षा करने के कारण वह भोले बाबा से दूर हुई, रामायण में सती को पीहर पक्ष का अभिमान था, भगवान शंकर को सती का दु:ख सताता है आखिर भोले बाबा ने कहा होई सोई जो राम रचिराखा। आखिर में सती का परित्याग हुआ, सती ने कहा जनम जनम मुझे पति रूप में भगवान शिव प्राप्त हो । आगे महाराज ने कहा रामायण ग्रन्थ हमारे सभी के घर में होना चाहिए । राम का जन्म हमारे घट में होना चाहिए, जो दुख हमे मिलता है तो कर्मों का लेखा चुकता है । आगे मनु और शतरूपा के प्रसंग का वर्णन किया । रामजन्म की कथा का विस्तार करते हुए महाराज ने कहा ईश्वर ने 24 अवतार धरती पर लिए लेकिन जब जीव आर्तभाव से पुकारता है तब प्रभु उसके लिए सूक्ष्म रूप लेकर आते है। चौपाई “तब तब धरी प्रभु विविध शरीरा” राम जन्म के प्रसंग पर महाराज ने राम नाम की व्याख्या करते हुए बताया कि ” राम सच्चिदानंद दिनेशा ” ईश्वर आंनद का स्वरूप है। कलयुग में जब कथा, सत्संग, भजन करते हुए हमारा मन निर्मल होता हे तब आनंद रूप ईश्वर हमारे भीतर प्रकट
रामकथा में राम जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया
