उदयपुर में हुई धर्म संसद
गुजरात, मध्यप्रदेश व राजस्थान के संत, महंत व गादीपति हुए शामिल
उदयपुर, 18 जुलाई। ’श्री संत समाज’ की धर्म संसद गुरुवार को स्थानीय किसान भवन में आयोजित हुई। लसाड़िया गादीपति विक्रमदास महाराज के संरक्षण व संत गुलाबगिरी महाराज के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न इस धर्म संसद में गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान के आदिवासी समाज में कार्यरत पूज्य संत, धाम-धूणी गादीपति और भक्तजनों ने भाग लिया।
सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने सभी धर्म गुरुओं का उपरणा ओढ़ा कर स्वागत, अभिनंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म गुरुओं ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कतिपय तत्वों द्वारा वर्तमान में जनजाति समाज की मूल संस्कृति को हानि पंहुचाई जा रही है। साथ ही उन्होंने युवाओं में फैलते वैचारिक प्रदूषण और धर्मान्तरण पर भी चिंता व्यक्त की। धर्म संसद में जनजाति समाज के दीर्घकालिक विकास, संस्कृति-रक्षा व समाज सुधार के लिए प्रस्ताव भी पारित किए गए। इन प्रस्तावों में जो दृढ़ राखे धर्म को… जो कि हमारे पुरखों का विचार है। इस विचार का अभिप्राय धर्म अर्थात सनातन धर्म जिसे आत्मसात करेंगे। आदिदेव महादेव व आदिशक्ति हमारे मूलाधार है। इसी से हम आदिवासी है। गवरी जैसी साधना पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। कुल ऋषि वालमा व भीली रामायण पर नियमित शोध व चर्चा करेंगे। जनजातियों के सभी गोत्रों की कुलदेवी व कुलदेवता का पूर्ण सम्मान करेंगे। जय सीताराम बोलने वाले रामा दल के राष्ट्रीय संत सुरमाल दास जी महाराज पर फिल्म बनाई जाएगी। त्रिवेणी बेणेश्वर में संतों का प्रतिवर्ष माघपूर्णिमा को शाही स्नान का आयोजन करेंगे। जनजातीय आस्था स्थलों का संरक्षण व विकास करेंगे। सरकार का सहयोग लेंगे। परम्परागत संबोधन राम-राम, जै गुरू, जै रामजी की, जै सीताराम को जोर-जोर से बोलने और प्रचार-प्रसार करने का निर्णय लिया।
सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने सभी धर्म गुरुओं का उपरणा ओढ़ा कर स्वागत, अभिनंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म गुरुओं ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कतिपय तत्वों द्वारा वर्तमान में जनजाति समाज की मूल संस्कृति को हानि पंहुचाई जा रही है। साथ ही उन्होंने युवाओं में फैलते वैचारिक प्रदूषण और धर्मान्तरण पर भी चिंता व्यक्त की। धर्म संसद में जनजाति समाज के दीर्घकालिक विकास, संस्कृति-रक्षा व समाज सुधार के लिए प्रस्ताव भी पारित किए गए। इन प्रस्तावों में जो दृढ़ राखे धर्म को… जो कि हमारे पुरखों का विचार है। इस विचार का अभिप्राय धर्म अर्थात सनातन धर्म जिसे आत्मसात करेंगे। आदिदेव महादेव व आदिशक्ति हमारे मूलाधार है। इसी से हम आदिवासी है। गवरी जैसी साधना पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। कुल ऋषि वालमा व भीली रामायण पर नियमित शोध व चर्चा करेंगे। जनजातियों के सभी गोत्रों की कुलदेवी व कुलदेवता का पूर्ण सम्मान करेंगे। जय सीताराम बोलने वाले रामा दल के राष्ट्रीय संत सुरमाल दास जी महाराज पर फिल्म बनाई जाएगी। त्रिवेणी बेणेश्वर में संतों का प्रतिवर्ष माघपूर्णिमा को शाही स्नान का आयोजन करेंगे। जनजातीय आस्था स्थलों का संरक्षण व विकास करेंगे। सरकार का सहयोग लेंगे। परम्परागत संबोधन राम-राम, जै गुरू, जै रामजी की, जै सीताराम को जोर-जोर से बोलने और प्रचार-प्रसार करने का निर्णय लिया।
मनसा वाचा व्रत कथा के चार माहों के आयोजन में क्षेत्र में तीर्थ यात्राओं व पैदल यात्राओं का आयोजन करने, संत सुरमालदास महाराज के कृतत्व-व्यक्तित्व को शिक्षा पाठ्यक्रम में सम्मिलित कराने, पुरखो की स्मृति में अधिकाधिक वृक्षारोपण-बरगद, पीपल, बिल्व वृक्षों का रोपण करने का भी प्रस्ताव लिया। प्रवक्ता बंसीलाल कटारा ने बताया कि इस धर्म संसद में 70 से अधिक संतों की उपस्थिति रही। समाजसेवी चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, बी.एस.राव, डॉ. लक्ष्मण राठौड़, सी.बी. मीणा, दीपक शर्मा, विभोर पटवा, बंसीलाल कटारा, परमेश्वर मईड़ा भी उपस्थित रहे।
