सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं संस्कृति विकास में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण – प्रो. सारंगदेवोत

उदयपुर 17 फरवरी। सूचना और जानकारी देने से कही अधिक आवश्यक समाज में समाज को साझा करते हुए विवेक जागृत करना मीडिया अथवा समाचार पत्रों का कार्य है जिससे समाज के जानने के बुनियादी अधिकार को बनाए रखा जा सके। समय और परिस्थितियों के मद्देनजर संचार के माध्यमों और उनकी प्रासंगिकता में भी बदलाव आए है, लेकिन इनके प्रभावों से कोई भी कालखण्ड अछूता नहीं रहा है। समाज से जुड़े मुद्दे और मसलों के कारणों और समाधानों पर कार्य करने, चेतना पैदा करने का दायित्व मीडिया पर रहा है। मीडिया को एक तरह से समाज का दर्पण कहा जा सकता है। देश की मीडिया ने स्वतंत्र अभिव्यक्ति से लेकर इंमरजेंसी तक के समय को देखा है और राष्ट्र को दिशा देने का कार्य किया है। उक्त विचार शनिवार को जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विवि की ओर से स्थापित  कविराव मोहनसिंह पीठ की ओर से पत्रकारिता, मीडिया शिक्षण और रोजगार विषय पर आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान में प्रख्यात लेखक और संपादक ओम थावनी ने बतौर मुख्य वक्ता कही।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएॅ  बहुत है किन्तु सुरक्षित रोजगार तथा नवीन तकनीकों के अनुरूप पाठयक्रम और पाठ्यचर्या के गठन और संचालन एक बड़ी चुनौति है। जिस पर गंभीरता से प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके साथ पत्रकारिता तथा भाषा सजगता,लोकसंचार का उपयोग भी ऐसे क्षेत्र है जिन पर कार्य करना आवश्यक है।
राष्ट्रीय व्याख्यान के दौरान पत्रकारिता, साहित्य लेखन, आलोचना एवं समाचार पत्रों के संपादन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने और हिन्दी भाषा के लिए अतुलनीय अवदान के लिए लेखक संपादक ओम थानवी को संपादकाचार्य सम्मान से विभूषित किया गया।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो एस एस सारंगदेवोत ने कहा कि परिवर्तनशील जगत में परिस्थितियांे का अध्धयन करना, चिन्तन, मनन करते हुए समाचार देना साथ ही देश की सांस्कृतिक, साहित्यिक परंपराओं को संजोने के साथ आर्थिक-राजनैतिक मानदंडों पर नजर रखने का कार्य मीडिया का है। राष्ट्र विकासशील हो अथवा विकसित मीडिया उस राष्ट्र की उन्नति का द्योतक होता है। भारत आज युवा देश है। जिसने समय के साथ तकनीकों को अपनाया है। जिसका असर मीडिया क्षेत्र में भी देखा गया है वर्तमान समय में समाज में इलेक्ट्रोनिक मीडिया का बढ़ता दखल इसका उदाहरण है।

कविराव मोहनसिंह पीठ के डॉ. उग्रसेन राव ने कविराव के साहित्य के योगदान पर प्रकाश डालते हुए व्याख्यान के बारे में जानकारी साझा दी ।

इस मौके पर वरिष्ट साहित्यकार और लेखक किशन दाधिच, साहित्यकार सदाशिव श्रोत्रिय, कवि राव अजातशत्रु, प्रो गजेन्द्रनाथ माथुर, प्रो मंजु मांडोत, प्रो सरोज गर्ग, डॉ रचना राठौड़, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. सुनीता मुर्डिया, डॉ. भारत सिंह देवड़ा, सहित विद्यापीठ के डीन डायरेक्टर्स सहित शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ कुलशेखर व्यास ने किया।

By Udaipurviews

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