उदयपुर। साहित्यकार मंच सिरोही एवं ब्रह्मकुमारी संस्थान के साझे में आबूरोड स्थित मानसरोवर परिसर में दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन’ का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में उदयपुर से इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू, साहित्यकार डॉ. हुसैनी बोहरा एवं नाट्य निर्देशक एवं रंगकर्मी सुनील टांक को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया।
सम्मेलन के प्रथम दिवस तीन सत्र आयोजित Youthkiawazudr@gmail.
दूसरे दिन के प्रथम सत्र में “हिन्दी नाटक और रंगमंच की वर्तमान चुनौतियाँ” विषय पर विचार-विमर्श किया गया। डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने कहा कि राजस्थान की नाट्य परंपरा अत्यंत समृद्ध है और ‘गवरी’ जैसी लोकनाट्य परंपरा इसकी जीवंत मिसाल है। उन्होंने उदयपुर में सर्वभाषायी नाटकों के आयोजन का भी उल्लेख किया।
नाट्य निर्देशक एवं रंगकर्मी सुनील टांक ने अभिनय क्षेत्र की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फिल्म और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव से रंगमंच प्रभावित हुआ है। उन्होंने दर्शकों की नाटक के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए नए प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
द्वितीय सत्र में “मीडिया और हिन्दी साहित्य” विषय पर चर्चा हुई। डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने साहित्य और मीडिया के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक मीडिया के साथ सामंजस्य स्थापित करना समय की आवश्यकता है। तभी हम साहित्य को बचा सकते है।
वहीं डॉ. हुसैनी बोहरा ने मीडिया और साहित्य के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करते हुए बताया कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म ने रचनाकारों और पाठकों के बीच त्वरित संवाद को संभव बनाया है। मीडिया की भूमिका विकास में प्रारंभ से ही रही है, फिर चाहे प्रिंट मीडिया का युग हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का युग हो
सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों, नाटककारों, कवियों एवं कवयित्रियों ने भी अपने विचार साझा किए। समापन सत्र में सभी अतिथियों एवं वक्ताओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन कार्यक्रम की संयोजक डॉ. विभा सक्सेना ने सम्मेलन की रूपरेखा एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी का आभार व्यक्त किया और सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन में उदयपुर के जुगनू, बोहरा, टांक की सशक्त अभिव्यक्ति
