उदयपुर। समता मूर्ति साध्वी जयप्रभा की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने कहा कि भारत पर्वों का देश है। अधिकांशतः सभी पर्वाे में कोई न कोई किवदन्ती जुड़ी है अथवा किसी न किसी महापुरुष की जीवन गाथा।
जैन धर्म के अनुसार विष्णु कुमार मुनि ने नास्तिक अधर्मी बलि को लेसन देकर जैन संतों की रक्षा की वहीं सनातन धर्म के अनुसार विष्णु भगवान ने दैत्यों के राजा बलि को पाताल लोक में भेजकर इन्द्र देव की रक्षा की। कुल मिलाकर अन्याय, अत्याचार और अनीति की फजीती कर न्याय नीति और सदाचार की स्थापना की गयी। द्वापर युग में श्री कृष्ण ने द्रोपदी के चीर हरण की रक्षा करके सारे जगत को रक्षा का संदेश दिया।
साध्वी ने कहा कि वणिक कलम दवात पर राखी बाँधकर संकल्प करते थे अनीति नहीं करेंगे, बहीखातों में गलत नहीं लिखेंगे। वणिक कलम के धनी और बात के धनी कहलाते थे। व्यापारी कान पर कलम रखते थे। वह कलम निरन्तर उनके कान में कहती थी गलत मत लिखना वरना जैसा मेरा मुँह काला है, वैसा तेरा मुंह भी काला हो जायेगा। यद्यपि राखी आज भी लोग पैन खाता, कलम आदि पर बांधते है परतु संकल्प या तो करते ही नहीं वरना संकल्प पर खरे उतरते नही। ऐसे लोगों को कलम कमाई की उपमा दी जाती है।
साध्वी ने कहा कि आज रक्षा बंधन का अर्थ संकीर्ण कर दिया गया है। रिश्ते रिसते हुए घाव हो रहे हैं। पैसे से पैसे का सौदा है। बहनें अधिक से अधिक उपहार पाने की इच्छुक रहती है। भाई सामग्री का हिसाब लगाकर कुछ जोड़कर राशि देता है। भाई बहिनों के पवित्र रिश्ते से स्वार्थ की गंध आ रही है। संवेदनाएं मृत हो रही हैं। रक्षा का भाव गौण हो रहा है।
लोगों ने रक्षा बंधन का अर्थ संकीर्ण कर दियाःसंयमज्योति
