मोदी की गारंटी” हवा हवाई साबित हुई – डॉ राजपुरोहित
राजस्थान सरकार के पहले बजट लेखानुदान पर उदयपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी का वक्तव्य
उदयपुर। 8 फरवरी। राजस्थान की “पर्ची सरकार” के पहले बजट लेखानुदान पर उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष कचरू लाल चौधरी और उदयपुर देहात जिला कांग्रेस प्रवक्ता डॉ संजीव राजपुरोहित ने वक्तव्य देते हुए कहा कि आज यह साबित हो गया की राजस्थान की “पर्ची सरकार” के पास राजस्थान के विकास का कोई विजन नही है।
उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष कचरू लाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश की “पर्ची सरकार” का राजस्थान को आने बढ़ाने का कोई विजन नही है। इस बजट लेखानुदान में गांव, किसान, महिलाओ और नौजवान के लिए कुछ भी नही है। विधानसभा चुनाव में किसानों की एमएसपी 2700 ₹ करने का वादा भी जुमला निकला। बजट में “पर्ची सरकार” ने सिर्फ 125₹ एमएसपी बढ़ाकर 2400₹ तक करी है। जबकि उससे पहले की कांग्रेस सरकार ने पिछले बजट में 150₹ एमएसपी में बढ़ाए थे। चौधरी ने कहा कि जयपुर में हाईटेक सिटी बनाए जाने की घोषणा करने वाले पहले ये बताए कि केंद्र की भाजपा सरकार में मोदी जी ने जो 100 स्मार्ट सिटी की घोषणा करी थी जिनमे हमारा उदयपुर भी था, वो अभी पूरी हो गई है क्या? माननीय सांसदों ने जो गांव गोद लिए थे उनका आज क्या हाल है ये सभी को पता है। क्या राजस्थान की “पर्ची सरकार” इसी तरह की हाईटेक सिटी बनायेगी?
चौधरी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने का इंतजार करती राजस्थान की जनता को भी निराशा ही हाथ लगी।
उदयपुर देहात जिला कांग्रेस प्रवक्ता डॉ संजीव राजपुरोहित ने कहा कि आज के लेखानुदान से राजस्थान की “पर्ची सरकार” ने “मोदी की गारंटी” की हवा निकाल दी है क्योंकि मोदी जी ने चुनाव में राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें गुजरात और यूपी जैसे पड़ोसी राज्यों के समान करने की गारंटी दी थी पर आज लेखानुदान में इसका जिक्र तक नहीं किया गया है। यह दिखाता है कि मोदी की गारंटी हवा हवाई है।
डॉ राजपुरोहित ने कहा कि किसान विरोधी सोच को प्रदर्शित करते हुए राजस्थान की “पर्ची सरकार” ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किए गए पृथक कृषि बजट को समाप्त कर दिया। किसान सम्मान निधि को 12000 ₹ तक करने की चुनावी घोषणा भी खोखली साबित हुई क्योंकि किसान सम्मान निधि को 8000₹ तक की गई है। कुल मिलाकर राजस्थान की “पर्ची सरकार” का यह पहला बजट लेखानुदान ना तो महंगाई कम करने वाला है और ना ही किसान, मजदूर, गृहणियों और नौजवानों की उम्मीदों पर खरा उतरने वाला है।
