अहंकार का धनुष टूटता है तभी सीता रूपी भक्ति वरमाला डालती है  : पुष्कर दास महाराज

– रामकथा में चौथे दिन राम सीता विवाह संपन्न हुआ  
उदयपुर, 11 अप्रेल।  सर्वेश्वर महादेव मंदिर,डोरे नगर, सेक्टर 3 में श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में संगीतमय रामकथा के चौथे दिन पुष्कर दास महाराज ने कहा राम की बाल लीला की व्याख्या करते हुए महाराज ने कहा जिस तरह प्रभु राम में बचपन से गुणों का सागर था उसी तरह आजकल बच्चों को सही संस्कार देने की जरूरत है। बच्चे की पहली गुरु मां होती है, आजकल बच्चे नशे की ओर ज्यादा प्रभावित हो रहे है। कथा के माध्यम से घर घर में माता पिता को बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों को झुकना सीखना चाहिए, बहु सास को झुके, बेटा पिता को झुके, तो घर में बच्चे भी बड़ों का आदर करेंगे । इसकी पहली शुरुआत माता पिता को करनी चाहिए, आज के विज्ञान के जमाने में बच्चे मोबाइल की ओर ज्यादा प्रभावित हो रहे इससे उन्हें दूर रहने की जरूरत है। हमने किसी जन्म में कोई पुण्य किए है तभी आज प्रभु ने संतों का संग और कथा सत्संग में बैठने का अवसर दिया । गुरु ज्ञान का दीपक ह्रदय में जलाना पड़ता है, सही ज्ञान का प्रकाश तो हमारे भीतर होना चाहिए। सत्संग रूपी ज्ञान गंगा तो बह रही है इसमें जो डुबकी लगा ले उसका जीवन सफल हो जाता है । जहां भक्ति होगी ईश्वर पीछे पीछे आता है भगवान कृष्ण ने जो कहा ओर राम ने जो किया वो हमे पालन करना चाहिए ।  आगे राम विवाह के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा राम ने अहंकार रूपी धनुष को तोड़ा तभी भक्ति रूपी सीता ने वरमाला डाली । राम,कृष्ण दोनों को अपने जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ा। महाराज ने कहा रामायण में राम और भरत का प्रेम था उसी तरह घर घर के प्रेम का वातावरण होना चाहिए । संयोजक विठ्ठल वैष्णव ने बताया

By Udaipurviews

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