उदयपुर। समता मूर्ति साध्वी जयप्रभा की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने कहा जो लोग विषयसुख पाने के लिए धर्मानुष्ठान करते है उन्होंने संसार में गुण दर्शन किया है दोषदर्शन नहीं किया है।
साध्वी ने कहा कि वैषयिक सुख वीभत्स है, गंदे है और जुगुप्सनीय अर्थात घृणा योग्य है। आश्चर्य गटर की गंदगी के सुख में व्यक्ति आसक्त है। कच्चा माल मशीन में डालते है तब आकर्षक पक्का माल बनता है परंतु शरीर रूपी मशीन में तो बढ़िया से बढ़िया माल डालते हैं परंतु प्रोडक्शन इतना गंदा और वीभत्स होता है कि कोई उसकी ओर देखना भी पसंद नही करता, पास में खड़ा होना तो बहुत दूर की बात है।
साध्वी ने कहा- ये गटर के सुख भी कब तक, जब तक भोगान्तराय और उपभोगान्तराय कर्म उदय में नही आये। साध्वी ने कहा कि शरीर अशुचिमय है। इसका निर्माण ही अशुचिमय रज और वीर्य से हुआ है तो फिर इसके प्रति आसक्ति क्यों।
संसार में गुणदर्शन करने वाले ही विषयसुख पाने के लिये करते है धर्मानुष्ठानःसंयम ज्योति
