उदयपुर, 21 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे पंन्यास प्रवर निरागरत्न विजय जी म.सा. ने बुधवार को धर्मसभा में कहा कि आपकी दृष्टि से सुखी-सुरक्षित कौन? 500 करोड़ का मालिक या झोंपड़ी में बैठ कर सामायिक करे वो? पुण्यशाली कौन? जो पैसे ज्यादा कमावे वो या ज्यादा खर्चा करे वो? इन सबका जवाब एक ही है जो पुण्य के उदय में पुण्य का बंध करे वो ही सुरक्षित और पुण्यशाली है। दुनिया में चार तरह के पुरूष होते हैं पुण्य पुरूष, पुष्प पुरूष, पूज्य पुरूष और पूर्ण पुरूष। जिनकी सामग्री का सदुपयोग हो, जो सत्कार्य ज्यादा करता हो, आपका नाम सुनते ही लोगों में आपकी जो छवि हो वो ही आप हो, अभी आपकी पहचान सामग्री से है या सत्कार्य से? किसी का भी बुरा नहीं करना, बल्कि बुरा करने का मन ही नहीं होना।
जो पुण्य के उदय में पुण्य का बंध करे वो ही सुरक्षित और पुण्यशाली है: निरागरत्न
