उदयपुर। दस लाख रुपए के चैक अनादरण के मामले में अदालत ने अभियुक्त को एक साल की कैद और बारह लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। पीठासीन अधिकारी ने अपने फैसले में लिखा कि चैक अनादरण के अपराध ने समाज व देश की अर्थ व्यवस्था को विपरित रूप से प्रभावित किया है।
प्रकरण के अनुसार सरकारी स्कूल के पास उत्तरी सुंदरवास निवासी हरभजन सिंह पुत्र अमरसिंह सोढी ने गायत्रीनगर हिरणमगरी सेक्टर 5 निवासी दीपक कुमार पुत्र डॉ श्यामसुंदर शर्मा के खिलाफ अधिवक्ता कमलेश दवे के जरिए दस अप्रेल 2017 को परिवाद पेश किया। जिसमें बताया कि फरियादी हरभजन ने आरोपी दीपक कुमार को अलग अलग समय क्रमश: एक लाख रुपए, दो लाख रुपए, दो लाख रुपए, सात लाख रुपए एवं दस लाख रुपए कुल 22 लाख रुपए उधार दिए। जिसके पुनर्भुगतान पेटे आरोपी ने अपनी सुविधा अनुसार चार चैक 15 सितम्बर 2016 का दो लाख का, 18 सितम्बर 2016 का दो लाख का, 15 नवम्बर 2016 का सात लाख का और दो दिसम्बर 2016 का एक लाख का चैक दिया। जो निर्धारित अवधि में बैंक में भुगतान के लिए डाले तो जो बैंक से इरेगूलरली ड्रॉन/एमाउंट एंड फिगर विफर के मेमो लगाकर बैंक ने 10 फरवरी 2017 को अनादरित कर दिए। इस पर फरियादी को पता चला कि आरोपी ने जानबूझ कर उसकी वैध रकम को हड़पने की नियत से उक्त चैक में अंको में पूर्ण रूप से दस लाख रुपए अंकित नहीं किए। फरियादी द्वारा संपर्क करने पर आरोपी ने दूसरा चैक भी जारी करने से इंकार कर दिया और धमकी अलग से दी। इस मामले में अदालत ने 10 अप्रेल 2017 को पेश परिवाद पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत प्रसंज्ञान लिया। दानों पक्षों की बहस सुनने के बाद विशिष्ट न्यायालय (एनआई एक्ट केसेज) क्रम संख्या-4 के पीठासीन अधकारी जितेंद्र सिंह शेखावत ने अपन ेफैसले में लिखा कि एनआई एक्ट अधिनियम 1881 में संशोधन कर चैक अनादरण को अपराध बनाया है और अधिनियम की 138 से 148 के रूप में अध्याय 17 जोड़ा गया ताकि चैक की स्वीकार्यता एवं विश्वसनीयता बढ़ाने एवं चैक अनादरण के अपराध के लिए दंड का प्रावधान करने के प्रयोजन में उपयुक्त उपबंध विधि में जोड़े गए हैं। अधिनियम में संमय-समय पर संशोधन के बाद भी इतना सब होते हुए देश में चैक अनादरण के प्रकरणों में बाढ़ सी आ गई है। यहां तक कि सरकार को उक्त अपराधों के विचरण के लिए विशेष अदालतों की स्थापना करनी पड़ी है। फिर भी संशोधन का प्रयोजन पूरा नहीं हो पाया। चैकअनारण के अपराध ने समाज व देश की अर्थ व्यवस्था को विपरित रूप से प्रभावित किया है। आरोपी दीपक कुमार शर्मा को दोषी करार देते हुए 10लाख रुपए के चेक अनादरण के मामले में एनआईएक्ट की धारा 138 में एक वर्ष का कारावास और बारह लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
चैक अनादरण के आरोपी को एक साल की कैद, 12 लाख का जुर्माना
