धार्मिक स्थलों पर मनोरंजन के व्यवसाय पर नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने विधानसभा और सांसद श्रीमती महिमा कुमारी मेवाड ने संसद में उठाई आवाज

राजसमंद। धार्मिक स्थलों पर मनोरंजन गतिविधियों एवं व्यवसाय के माध्यम से उसको बढ़ावा देने पर नाथद्वारा विधायक श्री विश्वनाथ सिंह मेवाड़ ने विधानसभा एवं राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड ने संसद में पुरजोर ढंग से आवाज उठाई है और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है। नाथद्वारा विधायक श्री विश्वराज सिंह मेवाड़ ने विधानसभा में कहा कि पर्यटन की दृष्टि से कुछ वर्षों से धार्मिक स्थलों पर अनुचित तरीके से मनोरंजन और व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत में अधिकतर लोगों की किसी न किसी धर्म में आस्था है।सदियों से लोग अपने धर्म अनुसार तीर्थ यात्रा करते आ रहे हैं, उन्हें लुभाने की कोई आवश्यकता नहीं है। यात्रियों के लिए धार्मिक स्थलों की सुविधा पर ध्यान देना आवश्यक है। लेकिन धार्मिक स्थलों की पहचान और रखरखाव से परे पर्यटन के नाम से मनोरंजन और संबंधित व्यवसाय तेजी से अपनाएं जा रहे हैं। इसे न तो धर्म स्थल का रखाव होता है, मनोरंजन भी अधूरा रह जाता है और आस्था फीकी पड़ जाती है। नाथद्वारा स्थित एक मूर्ति परिसर में मनोरंजन और मंदिर का भद्दा मिलाप देखा जा रहा है, मूर्ति इतनी विशाल है कि आप इसके अंदर जा सकते है और अंदर जाकर उसके कंधों तक चढ़ सकते हैं। मूर्ति का ऐसा उपयोग प्रयोग न ही धार्मिक, न ही नास्तिक, बल्कि अधर्म का प्रतीक ही कहा जा सकता है। सरकार से यह आग्रह और प्रश्न है कि क्या धर्म के नाम पर चल रही ऐसी गतिविधियों को रोका जाएगा? क्या स्थानीय लोगों की भावना और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा? आखिर धर्म की रक्षा आस्था से की जाती है, दिखावे से नहीं। सांसद श्रीमती महिमा कुमारी मेवाड़ ने भी संसद में उठाया मुद्दा: राजसमंद सांसद श्रीमती महिमा कुमारी मेवाड ने भी संसद में समान विषय पर अपनी बात कहते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को धार्मिक स्थलों की तरह ही रखना चाहिए। वहां मनोरंजन का व्यवसाय नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मैं मेरे राजसमंद परिवार को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने मुझे राजस्थान की सबसे बड़ी जीत दी है। जो भी उनका काम होगा मैं पूरी तरह मन लगाकर करूंगी। मेरा देश शक्ति और वीरता के नाम से जाना जाता है। मैं उस क्षेत्र की हूं जिसको मीराबाई, रानी पद्मिनी, रानी हाड़ी और पन्नाधाय से पहचाना जाता है। मैं उस वंश की बहु हूं जिसको पूरी दुनिया महाराणा प्रताप के नाम से जानती है। हमारे पुरखों ने सभी धर्मों को साथ रखा, सभी धर्मों को साथ लेकर चले, कभी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया, जब यहां धर्म के आधार पर भेदभाव की बात होती है तो दुख होता है।

By Udaipurviews

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