उदयपुर, 12 मई। संभागीय आयुक्त एवं राजस्थान स्टेट एकलव्य मॉडल स्कूल सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेन्द्र भट्ट ने एकलव्य मॉडल स्कूलों के चहुंमुखी विकास के लिए राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति नई दिल्ली से विस्तृत चर्चा करते हुए विद्यालयों के भौतिक विकास, ई-लर्निंग एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने हेतु अध्ययन अध्यापन के विभिन्न आयामों पर अतिरिक्त बजट स्वीकृत करने की बात रखी। इस पर एनईएसटीएस आयुक्त असित गोपाल ने अपनी सहमति प्रकट की। उन्हांने बताया कि विद्यार्थियों की किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारिक बदलाव के लिए प्रधानाचार्य एवं वार्डन का प्रशिक्षण लाभकारी सिद्ध होगा।
राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति नई दिल्ली, एवं पब्लिक हेल्थ फाउण्डेशन ऑफ इण्डिया के तत्वावधान में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों के प्रधानाचार्यों का चार दिवसीय प्रशिक्षण समारोह आयोजित किया गया जिसके समापन में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति नई दिल्ली के आयुक्त असित गोपाल ने कहा कि राजस्थान के एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए न्यूट्रिशन एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रधानाचार्यों एवं वार्डन को विशेष प्रयास करने होंगे।
उन्होने बताया कि एनईएसटीएस द्वारा दो राज्यों में इस प्रकार के प्रशिक्षण सफलता पूर्वक सम्पन्न हुए हैं। प्रधानाचार्यों एवं राजस्थान एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल सोसायटी को न्यूट्रिशन पोषण हेतु प्रतिदिन दिये जाने वाले भोजन एवं नाश्ते के मीनू में पोषण के लिए संतुलित आहार प्रोटीन, विटामिन, वसा, एवं मिनरल्स की सामग्री को शामिल करते हुए बनाना होगा। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के पहलू को ध्यान में रखते हुए एवं किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं व्यवहारिक बदलाव पर ध्यान देना होगा। जिससे वे दिग्भ्रमित नहीं हों इसलिए वार्डन व शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण हैं।
पीएचएफआई के प्रशिक्षण दल ने बताया कि स्वास्थ्य एवं पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, विद्यार्थियों की किशोरावस्था उम्र का वह पडाव है जहॉं विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है इस हेतु शिक्षक एवं वार्डन किशोर मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए व्यवहार करें। समारोह के अध्यक्ष अतिरिक्त आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने प्रधानाचार्यों एवं प्रशिक्षणार्थियों से फीडबैक लिया एवं पोस्ट प्रशिक्षण की कार्ययोजना बनाकर कार्य करने की बात कही। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करें जिससे वह निरन्तर प्रगति कर सकें।
प्रशिक्षण के तीसरे दिवस में अंजलि राजोरिया अतिरिक्त आयुक्त (प्रथम), जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग ने प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा की एवं इस प्रकार के प्रशिक्षण को लाभकारी बताते हुए कहा कि आवासीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यां एवं वार्डन की महत्ती भूमिका है हमें इस प्रकार के नये आयामों पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने संतुलित आहार के लिए मीनू में आवश्यक बदलाव के निर्देश प्रदान किये। प्रशिक्षण दल के डॉ. दीपक मांगा ने प्रशिक्षण का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा चार संभागियों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए अपने विचार व्यक्त किये। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति नई दिल्ली, के उपायुक्त एवं प्रशिक्षण प्रभारी इन्दिरा मुद्गल ने चार दिवसीय प्रशिक्षण की जानकारी दी एवं व्यवस्थाओं के लिए आभार व्यक्त किया।
एकलव्य मॉडल स्कूलों के चहुंमुखी विकास पर हुई चर्चा
