भारत डेनमार्क जल प्रबंधन अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

सरकारी स्कूल की दसवी की छात्रा हिमानी लोहार ने की अध्यक्षता

झील- नदी सुधार व जलप्रबंधन में नागरिक भूमिका पर हुआ गंभीर विमर्श

भारत व डेनमार्क सरकारों के ग्रीन स्ट्रेटेजिक सहयोग तथा उदयपुर नगर निगम व डेनमार्क के आरहुस नगर निगम के मध्य परस्पर साझेदारी समझौते के तहत चल रहे कार्यों के तहत विद्या भवन पोलिटेक्निक में आयोजित दो दिवसीय आयड नदी बेसिन जल प्रबंधन कार्यशाला गुरुवार को संपन्न हुई ।

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गाँव थूर की छात्रा हिमानी लोहार की अध्यक्षता में देश विदेश के विशेषज्ञों ने आयड नदी बेसिन के जल स्रोतों के समग्र प्रबंधन में किशोर, युवा , बुजुर्ग नागरिकों के वैज्ञानिक योगदान पर गंभीर चर्चा की ।

कार्यशाला का आयोजन विद्या भवन, डेनमार्क दूतावास , कोपेनहेगन विश्वविद्यालय, डेनिश हाइड्रोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, डवलपमेंट अल्टरनेटिव के साझे मे हुआ । इस अवसर पर सिटिजन साइंस इंसाइट पत्रक को जारी किया गया ।

संयोजक पोलिटेक्निक प्राचार्य डॉ अनिल मेहता ने बताया कि आयड नदी बेसिन को पच्चीस भागों (माइक्रो वाटरशेड) में विभक्त कर हर भाग में बरसात, भूजल स्तर, जल की गुणवत्ता का मापन का कार्य शुरू हुआ है । इससे जल की स्थिति व जलवायु परिवर्तन पर समझ बढ़ी है

प्रारंभ में डेनमार्क दूतावास की वरिष्ठ अधिकारी डॉ अनिथा के शर्मा ने भारत डेनमार्क सहयोग के तहत हो रहे कार्यों की जानकारी रखी । उन्होंने कहा कि उदयपुर का जन वैज्ञानिक मॉडल पूरे राज्य , देश व विश्व को नवीन दिशा प्रदान करेगा ।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक डेनमार्क के डॉ कार्सटन ने कहा कि वे उदयपुर के किशोरों, युवाओं की वैज्ञानिक प्रतिभा से हर्षित है वंही आम नागरिकों का जलस्रोतों से जुड़ाव प्रेरणादायी है ।

अध्यक्षीय उद्बोधन में छात्रा हिमानी लोहार ने कहा कि उदयपुर के किशोरों , युवाओं को उदयपुर की बरसात , भूजल स्तर, जल गुणवत्ता , पर्यावरणीय स्वास्थ्य के मापन में जोड़ना एक अनुकरणीय पहल है । यह मापन जल प्रबंधन की अत्याधुनिक मोडलिंग में काम आ रहा है ।

कार्यशाला मे पूर्व मुख्य नगर नियोजक सतीश श्रीमाली , कोपेनहेगन विश्वविद्यालय की ट्राईने एन्मार्क, हाइड्रोलॉजी मॉडलिंग विशेषज्ञ के प्रभु , कुलदीप परेता , भू विज्ञान विशेषज्ञ रवि शर्मा, झील संरक्षण समिति के सचिव डॉ तेज राजदान, पर्यावरणविद कुशल रावल ,बावड़ी संरक्षक सुनील लड्ढा, गीतांजलि इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी की प्रो. डॉ संगीता चौधरी , अरावली इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ सचिन शर्मा , इकलाई साउथ एशिया के प्रबंधक भूपेंद्र सालोदिया, वनस्पतिविद डॉ अनिता जैन, डी ए की सलाहकार के विजय लक्ष्मी , सह उपाध्यक्ष गीतिका गोस्वामी, शोधार्थी तान्या इस्सर , निधि सहरावत, डॉ योगिता दशोरा, पंकज सैनी, वर्षा जल संरक्षक महेश गढ़वाल, झील प्रेमी द्रुपद सिंह ने विचार रखे ।

आयड नदी बेसिन में स्थित सरकारी व निजी कोलेजों राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गाँव थूर , मदार, सीसारमा , आलोक , विद्या निकेतन , विद्या भवन , अभिनव स्कूल , स्टेनवार्ड स्कूल , अरावली इंस्टिट्यूट , गीतांजलि इंस्टिट्यूट के कलावती पूर्बिया , देवकी नन्दन शर्मा, ललिता राठौड़, रचना भारद्वाज, हर्षिता शर्मा , रौनक जैन , डॉ गिरीश शर्मा, डॉ प्रियंका चौधरी , महेंद्र पाल, गिरीश जोशी, सावित्री राव, शालिनी शास्वत , चैत्यव शर्मा, रामधन ने उनके द्वारा किये जा रहे कार्यो को प्रस्तुत किया ।

By Udaipurviews

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