अरावली पर्वतमाला पर सिर्फ खनन माफियाओं की ही नहीं बल्कि बड़े उद्योगपतियों की भी नजर – रघुवीर सिंह मीणा

अरावली को सुरक्षित रख कर ग्रीन कॉरिडोर बनाने का वादा करने वाले आज इसे अवैध खनन कॉरिडोर बनाना चाह रहे है – डॉ संजीव राजपुरोहित
अरावली पर्वतमाला संरक्षण पर उदयपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी का वक्तव्य।
उदयपुर। 23 दिसंबर। देश भर में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अरावली पर्वतमाला संरक्षण पर हो रहे आंदोलन पर उदयपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने अपना वक्तव्य जारी किया है।
रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि अरावली का अधिकांश भाग राजस्थान में आता है और राजस्थान में भी मेवाड़ इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। मेवाड़ के इतिहास में यहां के महान महाराणाओ ने इन अरावली की पहाड़ियों में रहकर ही मेवाड़ के स्वाभिमान और पर्यावरण की सुरक्षा की लड़ाई लड़ी। भाजपा नेतृत्व की सरकारों (दिल्ली, राजस्थान एवं हरियाणा) की रिपोर्ट के आधार पर ही यह फैसला किया गया है। यह सिर्फ खनन का ही मामला नहीं है बल्कि बड़े उद्योगपति पहले से ही तैयारी कर के इन जमीनों और पहाड़ियों को अपने कब्जे में करना चाहते है। अरावली पर्वतमाला हमारा सुरक्षा कवच है। अरावली पर्वतमाला पर हुए इस फैसले से हमारा पर्यावरण तहस-नहस हो जाएगा और हमारी आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित नहीं रह पाएगी। युवा पीढ़ी को भी अरावली पर्वतमाला पर सोशल मीडिया के साथ ही धरातल पर भी आंदोलन कर केंद्र और राज्य सरकार पर अरावली पर्वतमाला संरक्षण के लिए दबाव बनाना चाहिए जिससे कि इस फैसले पर पुनर्विचार हो। मुख्यमंत्री जी अगर इस मुद्दे पर जनता के साथ है तो उनसे हमारा कहना है कि आप सभी मिलकर सुप्रीम कोर्ट में अरावली पर्वतमाला संरक्षण के लिए मजबूती से पैरवी करें।
उदयपुर देहात जिला कांग्रेस प्रवक्ता डॉ संजीव राजपुरोहित ने भी अरावली पर्वतमाला संरक्षण पर कहा कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव में भाजपा ने संकल्प पत्र में केंद्र के साथ मिलकर अरावली को सुरक्षित रखने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने का वादा किया था, लेकिन आज वही केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इसे अवैध खनन कॉरिडोर बनाना चाह रही हैं। अगर अरावली नहीं बचेगी तो हम इसकी कल्पना कर सकते हैं कि इसके परिणाम क्या होंगे। अरावली केवल पहाड़ नहीं बल्कि राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों की जीवन रेखा है। वैज्ञानिक सच यह है कि अरावली एक निरंतर शृंखला है। इसकी छोटी पहाड़ियाँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी बड़ी चोटियाँ। अगर दीवार में एक भी ईंट कम हुई, तो सुरक्षा टूट जाएगी। अरावली कोई मामूली पहाड़ नहीं, बल्कि कुदरत की बनाई ‘ग्रीन वॉल’ है। यह थार रेगिस्तान की रेत और गर्म हवाओं (लू) को दिल्ली, हरियाणा और यूपी के उपजाऊ मैदानों की ओर बढ़ने से रोकती है। अगर छोटी पहाड़ियाँ खनन के लिए खुल गईं, तो रेगिस्तान हमारे दरवाज़े तक आ जाएगा और गर्म हवाएं तापमान को बढ़ा देंगी।
By Udaipurviews

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