मैग्नस अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप
-सुभाष शर्मा
उदयपुर, 26 मई: उदयपुर के मैग्नस अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन पर नवजात शिशु के उपचार में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नवजात के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही के कारण उनके बच्चे की आंखों की रोशनी चली गई और वह अब जीवन भर देख नहीं पाएगा।
नवजात के पिता, योगेश जोशी ने बताया कि उनकी गर्भवती पत्नी का इलाज डॉक्टर शिल्पा गोयल से चल रहा था। डॉक्टर ने सातवें महीने में पेट की सोनोग्राफी करवाई और लिक्विड की मात्रा कम होने का हवाला देते हुए अर्जेंट डिलीवरी कराने की सलाह दी। परिजनों ने इस पर क्रॉस चेक के लिए दूसरे सेंटर पर जांच करवाई, जिसकी रिपोर्ट सामान्य आई। फिर भी डॉक्टर ने दबाव डालकर प्रीमेच्योर डिलीवरी करवाई।
बच्चे के जन्म के बाद बाल चिकित्सक डॉक्टर मनोज अग्रवाल की निगरानी में इलाज चला, लेकिन इस दौरान डॉक्टर ने बच्चे का आर ओ पी टेस्ट नहीं कराया। इस लापरवाही के कारण बच्चा अब हमेशा के लिए अंधा हो गया है।
परिजनों का कहना है कि यदि डॉक्टर ने समय पर आर ओ पी टेस्ट किया होता, तो बच्चे की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती थी। अब वे अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं।
-सुभाष शर्मा
उदयपुर, 26 मई: उदयपुर के मैग्नस अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन पर नवजात शिशु के उपचार में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नवजात के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही के कारण उनके बच्चे की आंखों की रोशनी चली गई और वह अब जीवन भर देख नहीं पाएगा।
नवजात के पिता, योगेश जोशी ने बताया कि उनकी गर्भवती पत्नी का इलाज डॉक्टर शिल्पा गोयल से चल रहा था। डॉक्टर ने सातवें महीने में पेट की सोनोग्राफी करवाई और लिक्विड की मात्रा कम होने का हवाला देते हुए अर्जेंट डिलीवरी कराने की सलाह दी। परिजनों ने इस पर क्रॉस चेक के लिए दूसरे सेंटर पर जांच करवाई, जिसकी रिपोर्ट सामान्य आई। फिर भी डॉक्टर ने दबाव डालकर प्रीमेच्योर डिलीवरी करवाई।
बच्चे के जन्म के बाद बाल चिकित्सक डॉक्टर मनोज अग्रवाल की निगरानी में इलाज चला, लेकिन इस दौरान डॉक्टर ने बच्चे का आर ओ पी टेस्ट नहीं कराया। इस लापरवाही के कारण बच्चा अब हमेशा के लिए अंधा हो गया है।
परिजनों का कहना है कि यदि डॉक्टर ने समय पर आर ओ पी टेस्ट किया होता, तो बच्चे की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती थी। अब वे अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं।
