उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को मिली सफलता
उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के वैज्ञानिकों ने अफीम की नई किस्म विकसित की है। जिसे चेतक नाम दिया है। यह किस्म राजस्थान ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के अफीम उत्पादक किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
बताया गया कि विकसित नई किस्म चेतक में ना केवल मॉर्फिन बल्कि डोडा-पोस्त में भी अपेक्षाकृत ज्यादा उत्पादन प्रंाप्त होगा। विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविन्द वर्मा बताते हैं कि अफीम की नई किस्म विकसित करनेमें अखिल भारतीय औषधीय एवं सगंधीय पौध अनुसंधान परियोजना के डॉ. अमित दाधीच, पादप प्रजनक एवं परियोजना प्रभारी की टीम का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि यदि चेतक अफीम की पैदावार वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो अफीम की खेती से औसतन 58 किलोग्राम अफीम प्रति हैक्टर और औसत मॉफिन उपज 6.84 किलोग्राम प्रति हैक्टर तक प्राप्त की जा सकती है। दस से ग्यारह क्विंटल अफीम बीज और नौ से दस क्विंटल डोडा-पोस्त प्रति हैक्टर तक प्राप्त किया जा सकत है। बताया गया कि इस नई किस्म का फूल सफेद रंग का होता है। वहीं बुबाई के सौ से एक सौ पांच दिन बाद चीरा लगाया जाना होगा।
विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक कहते हैं कि प्रदेश के चित्तौड़गढ़, उदयपुर, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, कोटा, बारां एवं झालावाड़़ में अफीम की फसल उत्पादित की जाती है। ऐसे में चेतक अफीम के उत्पादन से किसानों की आय बढेगी। गौरतलब है कि अफीम की फसल केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से जारी पट्टों के लाइसेंस से ही की जा सकती है।
अफीम की नई किस्म ’चेतक’ विकसित
