कार्डियक समिट का समापन, नये आविष्कारों को अपनाने पर दिया जोर
उदयपुर। लेकसिटी में दिल के डॉक्टर्स की दो दिवसीय समिट नवाचारों को अपनाने और आमजन को हृदय रोगों के प्रति जागरूक करने के अभियान शुरू करने की सहमति के साथ सम्पन्न हुई। कार्डियोलॉजी में नवाचार, रोगी देखभाल और सफल परिणामों में वृद्धि विषय पर हार्ट एंड रिदम सोसायटी एवं एपीआई उदयपुर, पारस हेल्थ और आईएमए उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय सातवीं कार्डियक समिट का आयोजन किया गया था। आयोजन चेयरमैन डॉ. अमित खण्डेलवाल ने बताया कि सम्मेलन में देश के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया और अपने अनुभवों और केस आधारित स्टडीज को ध्यान में रखकर आधार पर पारम्परिक व नवीन तकनीकों के उपयोग व सफलता पर चर्चा की, चिकित्सकों ने एकमत होकर माना कि नयी तकनीकों की सफलता दर पुरानी चिकित्सा विधि से सरल और अधिक सफल है।
जटिल कोरोनरी इंटरवेंशंस पर पद्मश्री डॉ. डी.एस. गंभीर ने कहा कि पीसीआई तकनीक संकरी कोरोनरी धमनियों को ठीक करने की उन्नत तकनीक है। इसमें चिकित्सक इमेजरी तकनीक का उपयोग करते हुए एक एंजियोप्लास्टी कैथेटर को सावधानीपूर्वक उस जगह ले जाते हैं जहाँ कोरोनरी धमनी सबसे संकरी है। जब मरीज में बाईपास ग्राफ्टिंग को करने की स्थिति नहीं होती है। लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी में स्टेंटिंग के दौरान ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट्स का उपयोग किया जाता है जब डीईएस दवाओं को छोड़ते हैं जो स्टेंट की सतह पर जमा होने वाली कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करती हैं, जिससे स्टेंट की विफलता की संभावना कम होती है। इस तकनीक से स्टेंट की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है जिससे बीमारी को रोकने में मदद मिलती है। साथ ही उन्होंने कहा कि इतने वर्षों के अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि केस की गंभीरता को देखते हुए यह तकनीक कारगर है और भविष्य में इसका उपयोग बढ़ेगा।
प्रिवेन्टिव कार्डियोलॉजी पर नई दिल्ली के डॉ. मोहित गुप्ता ने कहा कि प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी दिल और रक्तवाहिनियों की बीमारियों को रोकने के उपाय दर्शाती है। इसमें जीवनशैली में बदलाव जैसे कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से परहेज और शराब का सेवन सीमित करना शामिल है। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसे जोखिम कारकों का समय पर प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है। नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग से हृदय रोगों की प्रारंभिक पहचान और इलाज संभव होता है। इन उपायों से हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखना और रोगों की संभावना को कम किया जा सकता है।
डीवीटी एंड पुल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म पर डॉ. अमित गुप्ता, डायबिटिज व हार्ट विषय पर डॉ. दीपक खण्डेलवाल व प्रवीण कहाले, इको वर्कशॉप के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
