आयड़ जैन तीर्थ में नवपद ओली के तपस्वियों का हुआ पारणा एवं बहुमान  

साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की  
उदयपुर 29 अक्टूबर। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में रविवार को नवपद ओली में हुए विशेष पूजा-अर्चना के तहत सभी तपस्वियों को पारणा एवं बहुमान किया गया।  महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई। आयबिल नवपद ओली के आराधकों का पारणा निर्मला, डॉ. शरदजी. डॉ. हेमन्त कोठारी परिवार ने किया। तपस्वियों का बहुमान किया गया। श्री आदिनाथ मंदिर में अंतराय कर्म निवारण की पूजा पढ़ाई गई।  जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि विशेष महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा   ने कहां कि नवपद की नौ दिन बहुत ही आराधना आराधना साधना जप-जप के साथ सम्पन्न हुई। साध्वियों ने तप की महिमा को बताते हुए कहा कि तप सभी कठिन कर्मों का नष्ट करने वाली औषधि का रूप है। तप के माध्यम से व्यक्ति सार को जीतने वाला बन सकता है। इस कारण आयबिल तप सर्वोत्तम तप है। इसमें नि: स्वार्थता जैसे गुण समाहित है। आत्मा तपस्या के मार्ग से आगे निकल जाती है। श्रीपाल एवं महासती भयणा सुंदरी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। श्रावक-श्राविकाओं के तप की अनुमोदना की।   चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।

By Udaipurviews

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