-विश्व आदिवासी दिवस एकजुटता प्रतीक: डूंगरपुर में उमड़ा जन सैलाब
– सांसद रोत मुख्यमत्री तीखा हमला
-जुगल कलाल
डूंगरपुर,09 अगस्त। डूंगरपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में आदिवासी समाज ने एकजुटता और स्वाभिमान का ज्वलंत संदेश दिया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग, डीजे की धुनों और वाहन रैलियों के साथ पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर पहुंचे। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर लोगों का जुटना शुरू हो गया था, और दोपहर तक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रकृति पूजा और आदिवासी महापुरुषों को श्रद्धांजलि देकर की गई। स्थानीय युवक और युवतियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए आदिवासी संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरी।
आदिवासी समाज को दबाने का सपना छोड़ दे – सांसद रोत –कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के प्रति हो रहे अन्याय पर सांसद राजकुमार रोट ने जमकर आवाज उठाई। उन्होंने कहा, “कुछ लोग कांकरी डूंगरी प्रकरण को फिर से खोलने की धमकी दे रहे हैं। अगर उनका उद्देश्य आदिवासी समाज को जेल भेजना है, तो हम इसके लिए तैयार हैं। लेकिन हम उनके सामने घुटने नहीं टेकेंगे।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि समय आने पर इस क्षेत्र से उनके पैर उखड़ जाएंगे। “हम किसी धर्म का विरोध नहीं करते, लेकिन हमारे समाज को बदनाम करने की कोशिशें हमें बर्दाश्त नहीं।” रोट ने शराबबंदी की मांग करते हुए कहा, “हम गोविंद गुरु महाराज और संत सुरमालदास के अनुयायी हैं और इस क्षेत्र को शराब मुक्त बनाना चाहते हैं। लेकिन सरकार यहां शराब के ठेके खोल रही है, महिलाओं के नाम पर ठेके दिए जा रहे हैं, यह शर्मनाक है।”
सीएम पर हमला: “ट्वीट डिलीट किया, किसके दबाव में?” –राजस्थान के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए रोट ने कहा, “सीएम ने विश्व आदिवासी दिवस पर ट्वीट किया, जो हमें अच्छा लगा। लेकिन आधे घंटे बाद उन्होंने ट्वीट डिलीट कर दिया। ऐसा क्या दबाव था कि मुख्यमंत्री को आदिवासी समाज के प्रति अपना समर्थन हटाना पड़ा? इससे साबित होता है कि उनकी सोच हमारे समाज के प्रति क्या है।” रोट ने आदिवासी समाज से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने का आह्वान करते हुए कहा, “आदिवासी बच्चों को पढ़ाना है, उन्हें खेल और शिक्षा में आगे लाना है, और नशे से दूर रखना है।”
विधायक उमेश मीणा का हमला: “सरकारी स्कूल में बच्चे हैं, लेकिन शिक्षक नहीं”- आसपुर विधायक उमेश मीना ने आदिवासी समाज की शिक्षा की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए बच्चे तो हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं। मैंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया, जिसके बाद 25 फीसदी शिक्षकों की भर्ती हो सकी।”
अनुतोष रोतका बयान: “पत्थरबाज किसी के सगे नहीं, हर गांव में टीम बनाकर करें गश्त”-बीएपी के जिला अध्यक्ष अनुतोष रोट ने पत्थरबाजों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा, “पत्थरबाज किसी के नहीं होते, ना आदिवासी, ना ब्राह्मण, ना बनिया। उनका मकसद सिर्फ पत्थरबाजी और लूट करना होता है। इन्हें रोकने के लिए हर गांव में 10 लोगों की टीम बनाकर रात में गश्त की जाए।”
कोतवाली सीआई भगवानलाल की अपील: “अपराध मुक्त बने आदिवासी समाज” –कार्यक्रम के दौरान कोतवाली थानाधिकारी भगवानलाल ने आदिवासी समाज को अपराध मुक्त बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “आदिवासी समाज एकजुट होकर जिस तरह से इस दिन को मना रहा है, उसी तरह से वह अपराध मुक्त भी बन सकता है।”
पारंपरिक वेशभूषा में उमड़ा जनसैलाब-इस कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिली। युवक सफेद धोती, कुर्ता, माथे पर साफा, गोफन, और मोर पंख से सजे नजर आए, जबकि महिलाएं और युवतियां पारंपरिक ओढ़नी, घाघरा, और आभूषण पहनकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रही थीं। यह महापर्व आदिवासी समाज की एकता, स्वाभिमान और अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति गर्व का प्रतीक बनकर उभरा।
