उदयपुर 06 मई / राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक विधि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की ओर से आयोजित मूट कोर्ट की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि मूट कोर्ट विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने का सशक्त माध्यम है। मूट कोर्ट वास्तविक अदालती कार्यवाही की प्रतिकृति होती है जिसका उद्देश्य विद्यार्थियोे को पक्षों के बीच विवादों से सम्बंधित अदालती कार्यवाही से अवगत कराना है। हर विद्यार्थियों को अपना ग्रूप बना कर किसी न किसी फैसले पर इस प्रकार का मंचन किया जाना चाहिए जिससे मन में किसी प्रकार कोई संकोच उत्पन्न न होवे। आज भी वंचित व असहाय व्यक्ति जागरूकता के अभाव में सुलभ न्याय से वंचित है, विद्यार्थियेां का आव्हान किया कि वे उनकी हर संभव मदद करे और किसी बेगुनाह को सजा न हो इसका पुरा ध्यान रखे। उन्होंने कहा विधिक सेवा के कार्य में सतत अध्ययन एवं व्यवहारिक शिक्षा महत्वपूर्ण स्थान रखती है। विधिक शिक्षा के लिए सम्पूर्ण समाज ही उसकी प्रयोगशाला है, विधि का विद्यार्थी समाज में उस प्रकार से प्रयोग करके नहीं देख सकता है जिस प्रकार से विज्ञान विषय में प्रयोगशालाओं में प्रायोगिक अध्ययन किये जाते है,ु विधि के विद्यार्थी क्लिनिकल लीगल एजुकेशन में मूट कोर्ट जैसी कार्यक्रमों के माध्यम से वही प्रयोग नाट्य मंचन के माध्यम से विधि विद्यार्थी सीख रहा है, साथ ही उन्होंने बताया की मूट कोर्ट के माध्यम से किस प्रकार विधिक शिक्षा का ज्ञानार्जन सुगम तरीके से किया जाता है।
विधि विभाग के विद्यार्थियों द्वारा हत्या के आपराधिक मामले का मंचन किया गया जो की भारतीय दंड संहिता की धारा 302 हत्या, 201 सबूत मिटाने, एन डी पी एस अधिनियम की धारा 27 से सम्बंधित था, न्यायलय में लोकाभियोजक की भूमिका का निर्वहन छात्र स्पर्श सोनी द्वारा किया गया वहीँ वकील बचाव पक्ष की भूमिका का निर्वहन छात्रा जसवंत नागदा ने किया। मूट कोर्ट में कुल सात गवाह पेश किए गए।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य प्रो. कला मुणेत ने मूट कोर्ट के विषय पर जानकारी दी। संचालन डाॅ. अनिला ने किया। इस अवसर पर डाॅ. धमेन्द्र राजौरा, डाॅ. के.के. त्रिवेदी, डाॅ. अनिला, डाॅ. प्रतीक जांगीण, डाॅ. मीता चैधरी, किर्ती डांगी, ज्ञानेश्वरी सिंह राठौड, अंजु कावडिया, रितवी धाकड निरव पण्डया, विनिता व्यास, सहित विद्यार्थियों ने भाग लिया।
