मानवता का महायज्ञ: नारायण सेवा संस्थान में 45वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह

14-15 मार्च को 51 जोड़े करेंगे नई जीवन यात्रा का शुभारंभ
उदयपुर। विश्व स्तर पर दिव्यांगता आज एक गंभीर सामाजिक विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की लगभग 16% आबादी किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता के साथ जीवन जी रही है। विकासशील देशों में जब दिव्यांगता के साथ गरीबी और सामाजिक पूर्वाग्रह जुड़ जाते हैं, तो विवाह जैसे सामाजिक संस्कार उनके लिए लगभग असंभव हो जाते हैं। भारत में भी लाखों दिव्यांग युवक-युवतियाँ केवल आर्थिक अभाव, सामाजिक संकोच और भविष्य की असुरक्षा के कारण वैवाहिक जीवन से वंचित रह जाते हैं।
इसी वैश्विक और राष्ट्रीय चुनौती के समाधान का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नारायण सेवा संस्थान आगामी 14-15 मार्च को संस्थान परिसर ‘सेवा महातीर्थ, बड़ी’ में 45वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह आयोजित कर रहा है। जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 102 दिव्यांग एवं निर्धन वर-वधू, 51 जोड़ों के रूप में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पवित्र अग्नि के सात फेरे लेकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश करेंगे।
इन जोड़ों में कोई हाथों से वंचित है, कोई पैरों से, कोई दृष्टिहीन है, तो कोई श्रवण-वाक् बाधित। उल्लेखनीय है कि इनमें से अनेक वर-वधू ऐसे हैं जिनका निःशुल्क ऑपरेशन, कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण और कौशल प्रशिक्षण इसी संस्थान में हुआ—और अब उनका विवाह भी यहीं संपन्न हो रहा है। यह केवल विवाह ही नहीं, बल्कि उपचार,पुनर्वास, आत्मनिर्भरता,विवाह, गृहस्थी की संपूर्ण जीवन यात्रा का उत्सव भी है।
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि पिछले 21 वर्षों में संस्थान अब तक 2510 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न करा चुका है। संस्थान दिव्यांगजन को दया नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और सुरक्षित भविष्य देने के लिए संकल्पित है।
दिव्यांग विवाह में वास्तविक बाधाएं और उनका समाधान
सामाजिक पूर्वाग्रह, आर्थिक अभाव, शारीरिक निर्भरता, आत्मविश्वास की कमी, उपयुक्त जीवनसाथी न मिलना और विवाह उपरांत गृहस्थी की असुरक्षा- ये वे प्रमुख कारण हैं जिनसे दिव्यांग विवाह रुक जाते हैं। संस्थान इन सभी बाधाओं को दूर करने के लिए व्यापक सहयोग प्रदान करता है:
• निःशुल्क चिकित्सा, ऑपरेशन एवं कृत्रिम अंग
• कौशल प्रशिक्षण व आजीविका मार्गदर्शन
• उपयुक्त जोड़ी का पारदर्शी चयन
• विवाह की संपूर्ण निःशुल्क व्यवस्था
• विवाह उपरांत गृहस्थी की सम्पूर्ण सामग्री उपलब्ध कराना
नवदंपतियों को दिया जाएगा गृहस्थी का संपूर्ण उपहार
संस्थान की ओर से नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की सुदृढ़ शुरुआत के लिए आवश्यक सामग्री भेंट की जाती है, जिसमें पलंग (बेड), गद्दा, तकिए, कंबल, चादर, अलमारी, गैस चूल्हा, गैस सिलेंडर, किचन सेट (स्टील के बर्तन), प्रेशर कुकर, तवा, कढ़ाई, थाली-गिलास सेट, पंखा, सिलाई मशीन, व्हीलचेयर/सहायक उपकरण, ट्रॉली बैग, पानी की टंकी/बाल्टी, ड्रम तथा दैनिक उपयोग की अन्य आवश्यक गृहस्थी सामग्री शामिल होती है। यह सामग्री नवदंपतियों को विवाह के बाद सम्मानपूर्वक अपना नया जीवन प्रारंभ करने में सहायक बनती है।
राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण
संस्थान अध्यक्ष ने बताया कि दिव्यांग जन के पुनर्वास को विवाह और आत्मनिर्भर गृहस्थ जीवन से जोड़ने का यह समग्र मॉडल विश्व में विरला ही है। देश-विदेश के दानदाता, समाजसेवी और शोधकर्ता इस मॉडल को समझने के लिए संस्थान से जुड़ते रहे हैं। यह पहल दिव्यांगों के प्रति दया-दान नहीं, बल्कि उन्हें गरिमापूर्ण पारिवारिक जीवन से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है।
दो दिवसीय आयोजन वैदिक परंपरा, मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न होगा। देश-विदेश के अतिथि, संत-महात्मा, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और दानदाता उपस्थित रहेंगे; कई स्वयं कन्यादान कर नवदंपतियों को आशीर्वाद देंगे। यह आयोजन 51 परिवारों के जीवन में नई आशा का संचार करेगा और समाज को यह संदेश देगा कि सेवा, संवेदना और समर्पण से ही सच्ची मानवता जीवित रहती है।
By Udaipurviews

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