जीव एवं ब्रह्म के एकीकरण से शिवत्व प्राप्ति की अलौकिक रात्रि है महाशिवरात्रि

उदयपुर 14 फरवरी | शहर की समुत्कर्ष समिति द्वारा शनिवार को महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर “शिवो भूत्वा शिवं यजेत्” विषयक 143 वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महाशिवरात्रि आदि पुरुष और आदि प्रकृति के तात्विक एकीकरण का महापर्व है। यह निर्विकार चेतना (शिव) और सृजनात्मक शक्ति (पार्वती) के अद्वैत सामंजस्य का प्रतीक है। इस महापर्व में आत्म-अनुशासन, इंद्रिय-निग्रह और लोकमंगल की भावना में समाहित है, जो तमोगुण के विनाश और सतोगुण के अभ्युदय को प्रेरित करती है। शिव उस ‘शून्य’ के प्रतीक हैं जिससे सारा अस्तित्व उत्पन्न होता है और अंततः उसी में विलीन हो जाता है।
गोष्ठी में प्रमुख वक्ता और विचारक आर्य सत्यप्रिय ने बताया कि यह शिव की कैलाशपति होने तथा शिव -पार्वती के विवाह की रात है। आध्यात्मिक स्तर पर, यह पुरुष (चेतना) और प्रकृति (ऊर्जा) के मिलन का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि सृष्टि का संतुलन तभी संभव है जब आत्मिक स्थिरता और सक्रिय ऊर्जा का सामंजस्य हो। कश्मीर में ‘हेराथ’ से लेकर दक्षिण के मंदिरों में भव्य अभिषेक तक, यह पर्व पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोता है।
इस अवसर पर शिक्षाविद विद्यासागर ने कहा कि महाशिवरात्रि का मूल निहितार्थ यह है कि हम अपनी सीमित पहचान अह्म को त्यागकर उस असीम चेतना का हिस्सा बनें जिसे हम ‘शिव’ कहते हैं। यह रात्रि “अकर्म” से “कर्म” और “स्थूल” से “सूक्ष्म” की ओर बढ़ने की यात्रा है।
विचार गोष्ठी में पीयूष दशोरा ,जगदीश चन्द्र चौबीसा,चिराग सेनानी,संदीप आमेटा तथा तरुण कुमार दाधीच ने भी अपने विचार व्यक्त किए l समुत्कर्ष पत्रिका के उप संपादक गोविन्द शर्मा द्वारा आभार प्रकटीकरण किया गया l समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का संचालन शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया ।
इस विचार गोष्ठी में सीमा गुप्ता, विजय कुमार शर्मा, गोपाल माली, वीणा जोशी,नर्बदा देवी, आशा जैन, राजेश सैनी, रामेश्वर प्रसाद शर्मा, मदन टांक,विशाल गुरुजी,सुंदर लालावत,रश्मि मेहता तथा तरुण शर्मा भी सम्मिलित हुए।
By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!