उदयपुर, 9 जून। हिरणमगरी सेक्टर-11 स्थित महावीर भवन में जैनाचार्य विजयराज जी म.सा. ने रविवार को पड़े कद ना बैरया रे पांवां मेवाड़ी आ पागड़ी, महाराणा प्रताप कहयो, चाहे कट जावे आ गाबड़ी के संगान से धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप न केवल भारतीय इतिहास के चमकते सितारे हैं अपितु सम्पूर्ण विश्व में माटी, धर्म, संस्कृति एवं संस्कारों के सजग प्रहरी क रूप में जाने जाते हैं। यही कारण रहा कि मेवाड़ कभी मुगलों के अधीन न रहा। वे संकल्प के धनी पुरूषार्थी पुरूष थे, इसलिए 484 वर्ष व्यतीत होने क बाद भी पूरा देश महाप्रतापी महाराणा प्रताप की जन्म जयंती हर्षोल्लास केे साथ मना रहा है। महाराणा प्रताप के संकल्प में हवाओं, दिशाओं और भावों को मोड़ने की ताकत थी। हम भी इसी राजस्थानी धरा के वाशिंदे हैं, हम भी उनकी तरह दृढ़ संकल्पित बने। कार्यक्रम संयोजक ललित हिंगड़ ने बताया कि प्रवचन पश्चात स्वामीवात्सल्य का लाभ गुरू भक्त परिवार ने लिया एवं माणक जारोली, शान्ता बारोला एवं लसोड़ परिवार की ओर से तीन-तीन प्रभावना वितरित की गई।
महाराणा प्रताप इतिहास के चमकते सितारे: आचार्य विजयराज
