उदयपुर में निकली राजस्थान की सबसे बड़ी रथयात्रा
उदयपुर। पुरी की तर्ज पर उदयपुर में भी मंगलवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली। ऐतिहासिक जगदीश मंदिर से भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को मंदिर की परिक्रमा के बाद जगदीश चौक लाया गया और अस्सी किलो चांदी से बने 21 फीट ऊंचे रथ में सवार किया गया। जिसके बाद भक्तों ने रस्सी के सहारे भगवान के रथ को खींचा। इस दौरान भक्त पूरे जोश-खरोश के साथ भक्ति भाव में भरकर भजन गाते हुए और भगवान जगदीश के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते चले गए।
इससे पहले जगदीश चौक से विशाल रथ यात्रा की शुरूआत भगवान जगदीश को 21 तोपों की सलामी के साथ किया गया। जहां से रथयात्रा घंटाघर, मोचीवाड़ा, भड़भूजा घाटी, संतोषी माता मंदिर, मंडी मार्शल चौराहा, अस्थल मंदिर, आरएमवी रोड, कालाजी गोराजी चौराहा और भट्टियानी चौहट्टा से होते हुए रात फिर से वापस जगदीश मंदिर पहुंची। यात्रा में शामिल होने वाले भक्त व रथ को खींचने वाले भक्त पारंपरिक ड्रेस सफेद जब्बा, पायजामा,धोती, सिर पर पाग धारण किए हुए थें। इस बीच उदयपुर आए पर्यटक तथा हजारों भक्त भगवान की एक झलक पाने के लिए जुटे रहे। भक्तों ने भगवान की रथ यात्रा का फूल बरसाकर स्वागत किया। रथ यात्रा के दौरान भगवान की विभिन्न सजीव झांकियां भी निकाली गई। जिनमें शहर के विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों का बड़ा योगदान रहा।
80 किलो चांदी से निर्मित रथ
रथ समिति के अध्यक्ष राजेंद्र श्रीमाली व सुनील भट्ट ने बताया, भगवान का रथ 80 किलो चांदी से बनाया गया है। जो 8 फीट चौड़ा 16 फीट लंबा और 21 फीट ऊंचा बना है। इसमें प्रभु जगन्नाथ स्वामी, माता लक्ष्मी, दानी राय जी के साथ विराजित हैं। रथ यात्रा निकलने से पहले 21 बंदूकों की सलामी दी गई।
भगवा पताकाओं से सजा है यात्रा मार्ग
रथयात्रा को पहले से भगवा पताकाओं से सजा दिया गया। रथ समिति ने रथयात्रा के मार्ग के मकान तथा प्रतिष्ठानों पर दस हजार भगवा पताकाएं एक दिन पहले लगा दी थी।
आग लगने से मची अफरा-तफरी, तीन महिलाएं झुलसी
रथयात्रा के दौरान एक बार अफरा-तफरी का माहौल भी बन गया, जब शिवजी का स्वांग रखे एक व्यक्ति आग के गोले बनाकर करतब दिखा रहा था। उसी दौरान आग फैल गई और तीन महिलाएं उसकी चपेट में आ गई। रथयात्रा में शामिल लोगों ने तत्काल उन्हें संभाला तथा एमबी अस्पताल पहुंचाया। तीनों ही महिलाओं को भर्ती कर लिया गया तथा उनका उपचार जारी है। बताया गया कि तीनों की स्थिति खतरे से बाहर है।
उदयपुर में रथयात्रा का इतिहास
जगदीश मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1709 ईस्वी में तत्कालीन महाराणा जगतसिंह ने करवाया था। उस समय तत्कालीन महाराणा रथ को खींचते थे। इसके बाद रथ को जेठी समाज के लोग पूरे रास्ते खींचते थे। कुछ साल बाद यात्रा को मंदिर से बाहर निकालना बंद कर दिया गया। महाराणा भूपाल सिंह के समय से मंदिर में ही ठाकुरजी की रथयात्रा निकाली जाती थी। उस समय मंदिर में गिने चुने भक्त प्रभु की इस रथयात्रा में शामिल होते थे। प्रभु के रथ को 1996 में मंदिर से नीचे उतारा गया। आयोजक बताते है कि 1996 में जब पहली बार भगवान जगन्नाथ राय का रथ मंदिर से बाहर नगर भ्रमण पर निकला। तब पारंम्परिक रथ के साथ धर्माेत्सव समिति की दो झांकियां थी।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने प्रभु जगन्नाथ स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना कर रजत रथ खींच, मेवाड़ की खुशहाली की कामना की
शहर में भगवान जगन्नाथ स्वामी की विशाल रथयात्रा मंगलवार को भक्ति-भाव के साथ निकली। मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ शहर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर के पुजारियों-सेवादारों के आमंत्रण पर 31 वेदपाठी ब्राह्मणों के दल के साथ जगदीश मंदिर पहुंचे, जहां भगवान जगन्नाथ स्वामी की विशेष पूजा-अचर्ना कर मेवाड़ की खुशहाली की कामना की। इसके बाद भगवान के विग्रह एक-एक कर रजत रथ में सवार होने के लिए विधि-विधान के साथ मंदिर से जगदीश चौक पहुंचे। जगदीश चौक में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने रजत रथ में सवार भगवान जगन्नाथ स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना कर प्रभु का रथ खींचा। इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि धर्म-संस्कृति के संरक्षण के लिए मेवाड़ प्राचीनकाल से ही प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता आ रहा है और आगे भी करता रहेगा। जगन्नाथ स्वामी का रथ खींचकर खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं और प्रभु से मेवाड़ की खुशहाली की कामना करते हैं।
रथयात्रा की झांकियां :






