भागवत कथा सुनने से दुख दूर होता है : पुष्कर दास महाराज

– आरके पुरम में चल रही भागवत कथा अमृत महोत्सव में भगवान विष्णु ने बालक ध्रुव को साक्षात्कार दर्शन दिए  
उदयपुर, 4 दिसम्बर।  शहर के आरके पुरम, गिरिजा व्यास पेट्रोल पंप के पीछे,श्री नाथ नगर, साईं अपार्टमेंट के पास में पुष्कर दास महाराज के द्वारा चल रही संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन भगवान विष्णु ने बालक ध्रुव को साक्षात्कार दर्शन दिए। संयोजक विठ्ठल वैष्णव ने बताया कि कथा के दूसरे दिन गुरुवार को व्यासपीठ से पुष्कर दास महाराज ने कहा कि भागवत में कलयुग का स्थान चार जगह बताया है स्वर्ण (सोना) में, जुआ में, शराब में, बाजारू स्त्री में,  शास्त्रों में सप्त सरोवर, संगीत के 7 स्वर, इसलिए भागवत की कथा 7 दिवसीय रखी जाती है। राजा परीक्षित के पास भी 7 दिन की अवधि थी। परीक्षित को कथा में रस इसलिए लगा क्यूं कि राजा की मौत निकट थी 7वें दिन, जिसकी मौत निकट हो उसका मन कथा में ओर भजन में लगेगा। राजा ने शुकदेव जी से प्रार्थना की आप मेरी मुक्ति करो मेरे पास 7 दिन का समय बचा है । राजा ने अनीति के धन का मुकुट पहना इसलिए उसकी बुद्धि बिगड़ी और ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डाला और ऋषि के बेटे को जब पता चला तो उसने राजा को श्राप दिया द्य संतों के आशीर्वाद से मती सही बनी रहती है तभी व्यक्ति प्रगति कर सकता है, कर्म की गति गहन है।  कर्म करते समय सभी को ध्यान रखने की जरूरत है, पहले एक धृतराष्ट्र था ,एक गांधारी थी परन्तु आज के समय में घर घर में गांधारी मिलेगी जो अपने संतानों की गलतियों पर पर्दा डाले। गलती घर का एक व्यक्ति करता परन्तु सजा सभी पाते । आज के समय में बेटा, बेटियों पर ध्यान देने की ज्यादा जरूरत है। माता पिता में संस्कार होंगे तो बच्चों को दे पाएंगे।
महाराज ने कहा सभी घरों में अपने बड़ों का आदर करे, पत्नी पति को झुके, बच्चे माता – पिता बड़ों को नित्य प्रणाम करे । बहु सास को प्रणाम करें, आदर, सम्मान करने पर ही हमारे घर के संस्कार बने रहेंगे। आगे कहा हर इंसान दुनिया में जन्म लेकर आता है तो मां के गर्भ में उल्टा ही होता है यही भागवत का उत्तानपाद है। उत्तानपाद की दो रानी होती है सुरुचि और सुनीति,  सत्संग में बैठे वही सुनीति है, सांसारिक सुख सुविधा में जो होता है उसे सुरुचि कहते है, जो सुनीति (ज्ञान) के आधीन होता है उसे शाश्वत सुख (ध्रुव) मिलता है। 5 साल का बालक भक्ति करने जाता है रास्ते में नारद जी मिलते है नारद जी बालक को मंत्र दीक्षा देते है। नमो भगवते वासुदेवाय और इसी मंत्र को ध्रुव जी जाप करते है और उन्हें जंगल में भगवान विष्णु दर्शन देते है। अंत में भगवान विष्णु और बालक ध्रुव की सुंदर झांकी के सभी भक्तों ने दर्शन किए। गुरुवार को कथा में नरेंद्र निंबार्क, चंद्र शेखर शर्मा, यशवंत पांडे, जितेंद्र शर्मा, जमना लाल साहू, मयूर वैष्णव, तुषार वैष्णव आदि उपस्थित रहे। संयोजक विठ्ठल वैष्णव ने बताया शुक्रवार को कथा में हिरणाकश्यप और भक्त प्रहलाद चरित्र के प्रसंग का वर्णन किया जाएगा ।

By Udaipurviews

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