मनुष्य के लिये सोना चांदी हीरे मोती रुपया धन संपदा नहीं, जीवन है दुर्लभःसुकनमुनि

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने प्रातकालीन धर्म सभा में कहा कि नवकार महामंत्र की आराधना एवं सम्यक ज्ञान ही आत्म कल्याण का मार्ग है लेकिन बिना श्रद्धा के यह संभव नहीं है। जो व्यक्ति नवकार महामंत्र पर श्रद्धा और विश्वास रखता है उसके जीवन में उन्नति और समता भाव का विकास होता है। जीवन में बिना श्रद्धा के कोई कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता। गुरु की सेवा बिना श्रद्धा से नहीं की जा सकती। शुभ फल उसी से प्राप्त होता है जो कार्य श्रद्धा पूर्वक किया जाता है।
गुरु भगवान का नाम लेकर कोई भी कार्य अगर श्रद्धा पूर्वक किया जाता है तो वह कार्य बिना विघ्न के संपन्न होता है। जीवन में कोई भी चीज दुर्लभ नहीं है। मनुष्य जीवन में व्यक्ति जो चाहे प्राप्त कर सकता है। सोना चांदी हीरे मोती रुपया धन संपदा इनमें से कोई भी वस्तु मनुष्य के लिए दुर्लभ नहीं है। लेकिन मनुष्य इन्हें ही दुर्लभ मानते हुए उनकी प्राप्ति में लगातार लगा रहता है। जबकि सत्य इसके विपरीत है।
इस संसार में अगर कोई दुर्लभ और दुर्लभतम है तो वह है मनुष्य जीवन। मनुष्य जीवन कई योनियों में परिभ्रमण के बाद, अपने पुण्य कर्मों के उदय के साथ ही आता है। लेकिन मनुष्य इन चीजों को भुलाते हुए महज धन दौलत के पीछे ही भागता रहता है। जबकि इनमें जीवन का कल्याण नहीं है। जीवन और आत्मा का कल्याण तो महावीर की वाणी और नवकार महामंत्र में छुपा हुआ है।
डॉ.वरुण मुनि जी ने धर्म सभा में कहा कि अगर मनुष्य के जीवन में श्रद्धा और विश्वास दृढ़ है तो उसके लिए किसी भी चीज को प्राप्त करना दुर्लभ नहीं है। केवल आस्था और विश्वास के साथ श्रद्धा होनी चाहिए। मनुष्य जीवन सबसे दुर्लभतम है जो यह हमें मिला है।  इसमें जो हमारे कर्म बंध हो रहे हैं उनकी निर्जरा करने का हमें उपक्रम करते रहना चाहिए। कई बार मनुष्य की चंचल प्रवृत्ति के कारण उसकी श्रद्धा और विश्वास डगमगा जाता है। इसी कारण से वह किसी अन्य कर्मों में उलझता जाता है। ऐसा करते-करते कब उसके पाप कर्मों का बंध हो जाता है उसे स्वयं पता नहीं रहता। श्रद्धा भाव केवल धर्म ध्यान पर ही नहीं बल्कि हमारे परिवार और रिश्तेदारों पर भी होना चाहिए। अगर समय रहते हमारे में श्रद्धा भाव जागृत हो गया तो हमारे जीवन को पल्लवित होने से कोई नहीं रोक सकता। इसलिए मनुष्य जीवन में श्रद्धा और विश्वास का महत्व समझें और इसी आधार पर अपने जीवन में उन्नति और आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।
धर्मसभा में अखिलेश मुनि ने सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। गुरुवार को बाहर से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!