जिनशासन में जन्म मिलना ही जीवन सार्थक

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में चल रहे चातुर्मास के दौरान आयोजित प्रवचन सभा में सुकन मुनि महाराज ने कहा कि जीवन में दुर्लभ, अनमोल क्या मिला है इसकी समीक्षा करनी चाहिए। जिनशासन, परमात्मा का शासन ऐसा है जिसको कितनी भी कीमत देकर भी प्राप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आज भी जिसके पास बंगले, कारें, पहचान है वो ही स्वयं को भाग्यशाली मानता है। उसकी सोच अभी सांसारिक ही है। उसके जीवन को सफल या सार्थक नही कहा जा सकता। खाने के लिए अन्न नही, रहने के लिए मकान नही, पहनने के लिये कपड़े नही फिर भी उसका जन्म सफल हुआ क्योंकि उसकी माता ने नवकार मंत्र की घुटी पिलाई गई है। गुरुजनों की वंदना करना सीखा है तब से जीवन सफल हुआ है।
उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को भी मंदिर लाना चाहिए। परमात्मा के शासन में जन्म यूँ ही नही मिलता। जब जन्म मिल गया है तो उसका लाभ उठाना चाहिए। व्यक्ति भले ही अंदर से गलत जानते हुए भी स्वयं को सही बताता है क्योंकि उसका अभिमान उसे ऐसा नही करने देता। जो किसी के कहने पर अपनी गलती मान ले तो वो देवता की श्रेणी में आ जाता है लेकिन चूंकि किसी दूसरे ने कहा इसलिए मानना नही है। रावण परस्त्री को लाया लेकिन कभी छुआ नहीं। अंदर से जानता था कि गलत कर रहा है लेकिन सभी उसे कह रहे थे इसलिए उसे मानना ही नही था।

By Udaipurviews

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