आलस कुंभकर्ण के जैसा और प्रमाद रावण के जैसा अतः इनका त्याग करो : निरागरत्न

उदयपुर, 11 सितम्बर। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे पंन्यास प्रवर निरागरत्न विजय जी म.सा. ने बुधवार को धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि नींव नहीं होगी और इमारत बनती रहेगी तो क्या होगा? पतन निश्चित है। समकित वो नींव के समान है जिसके बिना चारित्र भी निष्फल है। आयुष्य को एक क्षण भी बढ़ाया नहीं जा सकता, निर्धारित समय से पहले पूर्ण हो सकता है पर उससे एक्सट्रा टाईम तो कभी नहीं, अगर अपने जीवन को बदलना चाहते हो तो खुद को बदलो। आप स्वयं का आंकलन करें, धर्म में आगे बढ़ो, हमने धर्म कितना किया वो मत देखो, पाप कितना कम किया वो देखो। आप ये देखें कि जो मैं कर रहा हूं, उससे क्या होगा? आने वाला जन्म सुधरेगा या नहीं, आने वाले जन्म को सुधारने के लिए जीवन में से प्रमाद को दूर करो। हमारे सबसे बड़े शत्रु आलस और प्रमाद है। आलस कुंभकर्ण के जैसा है और प्रमाद रावण के जैसा, अतः इनका त्याग करो। चातुर्मास प्रवक्ता राजेश जवेरिया ने बताया कि पंन्यास प्रवर के निरन्तर प्रवचनों का श्रवण करने सैंकड़ों की संख्या में प्रतिदिन श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित हो रहे हैं, त्याग-तपस्याओं के ठाठ लगे हुए हैं।

By Udaipurviews

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