ज्ञान और विकास सिर्फ चाहने मात्र से नहीं होता इसके लिए प्रयास करना पड़ता है : आचार्य विजयराज

उदयपुर, 2 अगस्त। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय चातुर्मास के तहत हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने शुक्रवार को धर्मसभा में फरमाया कि ज्ञान आत्मा का ओरिजनल एवं असाधारण गुण है। यह आत्मा को छोड़कर कहीं नहीं जाता, इस पर अन्तराय का आवरण आ जाता है। जब ज्ञानावरणीय कर्म का क्षयोपशम हो जाता है तो व्यक्ति जो चाहे, वह याद करने में सक्षम बन जाता है। आगम कहते हैं कि ज्ञान को बढ़ाना है तो जिव्हा पर, स्वाद पर कंट्रोल करो। ज्ञान और विकास सिर्फ चाहने मात्र से नहीं होता अपितु इसके लिए सतत प्रयास करना पड़ता है। तुलसीदास जी ने इसीलिए कहा है कि करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान। हम गुण देखें, गुणी बनें। यदि हमारे भीतर गुणानुराग का भाव है तो हर व्यक्ति, हर वस्तु से गुण ग्रहण करने में सफल हो जाएंगे। पढ़ने-पढ़ाने की आदत से हमारा स्मृति कोष समृद्ध बनता चला जाता है इसलिए इतिहास प्रकाशपुंज, प्रेरणापुंज एवं मार्गदर्शक होता है। ज्ञात, ज्ञेय, ज्ञाता और ज्ञानी-ज्ञान के संदर्भ में इन चार पक्षों की चर्चा करते हुए आचार्य श्री ने फरमाया कि भौतिक जगत में लोग 25-50 साल पुरानी निरर्थक बातें तो याद रखते हैं पर आध्यात्मिक जगत में काम की सार्थक बातें भूल जाते हैं। इस समस्या का कारण ज्ञानावरणीय कर्म का बंध है, जिसे कमजोर करना जरूरी है। मनुष्य जितनी लगन से धन कमाने में लगता है उतनी लगन प्रभु से लगा ले तो ज्ञान की प्राप्ति सहज हो जाएगी। उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि पेड़ हरे-भरे होते हैं, इनकी गिनती हरी वनस्पति में होती है जो हमारे जीवन का मूलाधार है। सच ही कहा गया है कि ‘हरी में हरि का वासा है।’ वनस्पति का छेदन-भेदन कर हम अपने अस्तित्व का ही छेदन-भेदन करते हैं। जीवन जीने के लिए वनस्पति का उपयोग जितना जरूरी है, उतना ही करें। बेवजह वनस्पति को तकलीफ देकर अपने लिए मुसीबत मोल न लें। मीडिया प्रभारी डॉ. हंसा हिंगड़ ने बताया कि शुक्रवार से 45 स्वाध्यायियों का तीन दिवसीय आवासीय शिविर प्रारम्भ हुआ, जिन्हें पर्युषण में आठ दिन प्रवचन देने एवं सभी धार्मिक गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित करने का मार्गदर्शन व प्रशिक्षण आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. एवं उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. आदि संत-सतियों द्वारा दिया जाएगा। शिविर में भाग लेने हेतु 45 स्वाध्यायी चैन्नई, मनमाड, खरियार रोड़, मोरवन, सिंगोली, जयपुर, बिजयनगर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कानोड़, उदयपुर निम्बाहेड़ा, चंदेरिया आदि स्थानों से पहुंच चुके हैं। दिनांक 4 जुलाई को अरिहंत वाटिका में सप्तभय निवारण हेतु विशाल जाप का आयोजन किया गया। जाप में सैंकड़ों जोड़े भाग लेंगे।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!