वरदान बनी मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना
उदयपुर 13 अप्रैल। मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के माध्यम से राज्य सरकार होनहार छात्र-छात्राओं को निशुल्क कोचिंग उपलब्ध करवा कर उनका जीवन संवार रही है। मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के तहत कोचिंग पाने वाले लाभार्थी भी मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आभार जता रहे हैं।
निर्धन परिवारों के होनहार बच्चे अक्सर धनाभाव के कारण नीट की महंगी कोचिंग नहीं कर पाते और उन्हें अपने सपनों को यूँ ही छोड़ देने पर मजबूर होना पड़ता है लेकिन मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के लागू होने के बाद से स्थिति में व्यापक परिवर्तन दृष्टिगत होने लगा है। टीआरआई की अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी डॉ अमृता दाधीच ने बताया कि उदयपुर के टीआरआई परिसर में राज्य के कई जिलों की छात्राएं निशुल्क नीट कोचिंग प्राप्त कर अपना भविष्य संवार रही हैं तथा यहाँ उन्हें उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
डूंगरपुर की जया उदयुपर में कर रही निःशुल्क कोचिंग
डूंगरपुर के एक निर्धन आदिवासी परिवार में जन्मी जया कुमारी रोत बचपन से ही पढ़ने में होशियार थी। उनके पिता रामजी रोत एवं माता सविता देवी रोत ने उन्हें पढ़ने के लिए खूब प्रोत्साहित किया। जया की प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के ही सरकारी स्कूल राजकीय प्राथमिक विद्यालय मसानिया फला में हुई। इसके बाद उन्होंने जनजाति छात्रावास में प्रवेश हेतु आवेदन किया और फिर उन्हें राजकीय जनजाति छात्रावास बांसिया में प्रवेश मिला। यहाँ 10वीं तक पढ़ाई के पश्चात गोविंद गुरु राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हुई। 10वीं में 90.50 प्रतिशत अंक आने पर परिवार में उत्साह का पारावार न रहा। 11वीं में विज्ञान विषय का चयन किया और फिर हॉस्टल वार्डन की सलाह पर मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के तहत नीट की तैयारी हेतु फोरम भरा। इसमें परीक्षा देने के लिए उदयपुर के ढीकली स्कूल पहुंची और परीक्षा में अंतिम रूप से एलन से कोचिंग हेतु चयन हुआ। तब से जया उदयपुर के टीआरआई परिसर स्थित जनजाति छात्रावास में निवास कर रही है एवं यहाँ परिसर में एलन द्वारा कराई जा रही कोचिंग प्राप्त कर रही है। इस कोचिंग का सम्पूर्ण खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है और जया के लिए डॉक्टर बनने की राह आसान हुई है।
डॉक्टर बन करुंगी गांव का नाम रोशन
जया कहती हैं कि उनके गाँव में कई लोग अनपढ़ हैं जिन्हें अच्छी शिक्षा नहीं मिली। कई लोग 12 वीं तक पढ़ाई करके कोई काम धंधा करने लग गए। ऐसे में अब वह डॉक्टर बन पर न सिर्फ अपने परिवार का बल्कि पूरे गाँव का नाम रोशन करना चाहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें डॉक्टर बनने का अवसर दिया है जिसे वह हाथ से नहीं जाने देगी। उन्होंने मुख्यमंत्री का निशुल्क नीट कोचिंग हेतु आभार व्यक्त किया है।
आदिवासी अंचल की जया को मिला नीट की निशुल्क तैयारी का अवसर
