उदयपुर में मोयेंद्र फाउंडेशन द्वारा बनेगा सेवा, साधना, भक्ति, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट एवं राधा-कृष्ण मंदिर, आधुनिक गौशाला, हैप्पी होम और भव्य संगीत संग्रहालय से विकसित होगा अनूठा सेवा परिसर
उदयपुर। प्रत्येक मनुष्य को अपने पसंदीदा स्थल मंदिर, संगीत संग्रहालय देखने या गौ एवं मानव सेवा करने के लिए अलग-अलग स्थानों का चयन करना पड़ता है, लेकिन उदयपुर में जल्द ही एक ऐसा अनूठा परिसर विकसित होने जा रहा है जहाँ यह सभी अनुभव एक ही स्थान पर प्राप्त हो सकेंगे। शहर के ईसवाल ग्राम पंचायत के सेलू ग्राम में मोयेन्द्र फाउंडेशन की ओर से एक विशाल आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल का निर्माण प्रस्तावित है, जहाँ आमजन नयनाभिराम मंदिर में स्थापित होने वाली श्री राधा-कृष्ण की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।
इस परिसर में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि गौसेवा के लिए एक विशाल एवं सुव्यवस्थित गौशाला का भी निर्माण किया जाएगा, जहाँ गायों की सेवा और संरक्षण का कार्य किया जाएगा। इस पावन परियोजना के अंतर्गत ‘हैप्पी होम’ का निर्माण भी किया जाएगा, जहाँ वृद्धजनों को सभी आवश्यक सुख-सुविधाओं के साथ सम्मानपूर्वक जीवन यापन का अवसर प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही परिसर में एक भव्य संगीत संग्रहालय भी बनाया जाएगा, जहाँ संगीत प्रेमी भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत का आनंद ले सकेंगे। इसी को लेकर शुक्रवार को मोयेन्द्र फाउंडेशन की बैठक हुई। जिसमें परियोजना को लेकर चर्चा कर विविध निर्णय लिए गए।
आमजन से सहयोग और जनभागीदारी का आव्हान : मोयेन्द्र फाउंडेशन के निदेशक मुकेश माधवानी ने बताया कि इतनी बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए आमजन का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। इतने बड़े प्रोजेक्ट की पूर्णता समाज के सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार वस्तु या आर्थिक सहयोग देकर इस प्रकल्प में अपनी सहभागिता निभा सकता है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए मोयेन्द्र फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक, समाजसेवी कृष्णदासी रंजना भाटी ने निःस्वार्थ भाव से लगभग 10 बीघा (करीब 2 लाख 30 हजार वर्ग फीट) भूमि सामाजिक कार्यों के लिए दान स्वरूप प्रदान की है। अब यह संपूर्ण प्रोजेक्ट आमजन के सहयोग और जनभागीदारी पर आधारित है।
समाज सेवा के कार्य में योगदान देना हर व्यक्ति का कर्तव्य :
मोयेन्द्र फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक कृष्णदासी रंजना भाटी ने बताया कि समाज सेवा के कार्य में योगदान देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है और इसी भावना से मैंने यह भूमि इस परियोजना के लिए समर्पित की है। इस पावन भूमि पर ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्य होंगे जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनें। जब यहां मंदिर में भक्ति होगी, गौशाला में सेवा होगी और बुजुर्गों व असहाय को सम्मानपूर्वक जीवन मिलेगा। चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही, संगीत संग्रहालय एवं संगीत एकेडमी का भी निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि पर धर्म, करुणा, सेवा, संस्कृति और मानवता के मूल्यों का संगम देखने को मिलेगा। भविष्य में यह प्रोजेक्ट हमारे उदयपुर शहर को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में देश में पहचान दिलाएगा।
हर व्यक्ति अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करे सहयोग : मोयेन्द्र फाउंडेशन के डायरेक्टर दिवाकर अग्रवाल ने बताया कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब लोग मिलकर किसी उद्देश्य के लिए कार्य करें। यह परियोजना उसी सामूहिक सोच का परिणाम है। हम चाहते हैं कि हर व्यक्ति अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस कार्य में योगदान दे। चाहे वह सेवा के रूप में हो, वस्तु के रूप में या आर्थिक सहयोग के रूप में हर सहयोग इस परियोजना को मजबूत बनाएगा एवं ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
परियोजना पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण : मोयेन्द्र फाउंडेशन के डायरेक्टर विजय सऱाफ ने बताया कि यह परियोजना उदयपुर के लिए केवल धार्मिक या सामाजिक महत्व ही नहीं रखती बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। एक ही परिसर में आध्यात्मिकता, गौसेवा, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक धरोहर का संगम बहुत कम देखने को मिलता है। आने वाले समय में यह स्थान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। हमें विश्वास है कि यह पहल उदयपुर को एक नई पहचान देगी।
परिसर का हर हिस्सा बनेगा प्रकृति के अनुकूल, सौंदर्यपूर्ण और कलात्मक : मोयेन्द्र फाउंडेशन के सलाहकार एवं प्रख्यात आर्किटेक्ट सुनील लढ्ढा ने बताया कि इस पूरे परिसर की वास्तुकला भारतीय परंपरा और आधुनिक सुविधाओं के संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है। मंदिर की संरचना पारंपरिक शैली में होगी, जबकि गौशाला और हैप्पी होम को आधुनिक और उपयोगी ढंग से विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमारा प्रयास है कि परिसर का हर हिस्सा प्रकृति के अनुकूल, सौंदर्यपूर्ण और कलात्मक हो। जब यह परियोजना पूर्ण होगी तो यह वास्तुकला और सामाजिक दृष्टि से एक आदर्श मॉडल के रूप में सामने आएगी। यही प्रयास है।
परियोजना का संक्षिप्त परिचय
राधा-कृष्ण मंदिर बनेगा आध्यात्मिक चेतना का केंद्र
परिसर में बनने वाला श्री राधा-कृष्ण मंदिर पारंपरिक भारतीय वास्तुकला शैली में निर्मित किया जाएगा। यह केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सद्भाव और सांस्कृतिक जागरण का केंद्र होगा। यहां नियमित रूप से भजन, सत्संग, गीता-पाठ, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालु अपनी भक्ति भावनाओं को श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर सकें। यह मंदिर जाति, वर्ग और सम्प्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर सभी के लिए आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बनेगा।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी गौशाला : परिसर में प्रस्तावित गौशाला पूर्णतः सेवा-आधारित और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगी। यहां निराश्रित, बीमार और वृद्ध गायों के संरक्षण की विशेष व्यवस्था की जाएगी। वैज्ञानिक पद्धति से चारा प्रबंधन, चिकित्सा सुविधा और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही गौवंश से प्राप्त प्राकृतिक उत्पादों के उपयोग और गौ-संरक्षण के महत्व को लेकर युवाओं एवं किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। यह गौशाला भारतीय संस्कृति में निहित करुणा, सेवा और प्रकृति के सम्मान का जीवंत उदाहरण बनेगी।
हैप्पी होम: वृद्धों के लिए सम्मानजनक जीवन का केंद्र : इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण भाग हैप्पी होम होगा, जहां निराश्रित, असहाय और वृद्धजनों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जाएगा। यहां रहने वाले लोगों को भोजन, वस्त्र, चिकित्सा सुविधा, मानसिक परामर्श और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं बल्कि उन्हें समाज से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर और सम्मानपूर्ण जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।
संगीत संग्रहालय से सहेजी जाएगी सांस्कृतिक विरासत : परिसर में बनने वाला संगीत संग्रहालय भारतीय संगीत, लोककला और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र होगा। यहां शास्त्रीय, लोक और क्षेत्रीय संगीत का दस्तावेजीकरण किया जाएगा तथा विभिन्न पारंपरिक वाद्ययंत्रों का संग्रह और प्रदर्शन किया जाएगा। युवाओं के लिए संगीत कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन भी आयोजित किए जाएंगे। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा और उदयपुर को सांस्कृतिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान देगा।
