सोलरमैन ऑफ इंडिया इन उदयपुर : ऊर्जा स्वराज यात्रा के दूसरे दिन राजस्थान विद्यापीठ में
एनर्जी इंपोर्ट करने में भारत में हर वर्ष 16 लाख करोड़ रुपए का खर्च – प्रो. चेतन सिंह सोलंकी
उदयपुर/28.03.2024/ एक बार उत्सर्जित कार्बन दुनिया में 300 वर्षों तक रहता है और मानव जीवन को दूषित करता रहता है। उत्सर्जित कार्बन पूरी दुनिया में फैलता है, किसी एक देश में नहीं, अतः यह हमारा दायित्व है कि हम उन उपकरणों का प्रयोग करें जो कम से कम ऊर्जा की खपत करें। ये विचार गुरुवार को जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ में सोलरमैन ऑफ इंडिया से विख्यात प्रो. चेतन सिंह सोलंकी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि धरती पर तापमान में 1.3 डिग्री की बढ़ोतरी हो चुकी है और 1.5 से 2 डिग्री का परिवर्तन लक्ष्मण रेखा है। उन्होंने सोलर ए-एम-जी का नियम बताते हुए कहा कि सर्वप्रथम हम किसी भी एनर्जी का उपयोग नहीं करें, सोलर ऊर्जा का भी नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से जीना सीखें। जहां आवश्यकता है वहां न्यूनतम उपयोग करें और साथ ही ऊर्जा उत्पादन भी करें। ऊर्जा स्वराज का अर्थ है कि हम घर-घर में नहीं तो कम से कम अपने क्षेत्र में अपनी आवश्यकतानुसार ऊर्जा उत्पन्न कर पाएं।
कुलपति कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि, विद्यार्थी ऊर्जा सरंक्षण के कार्य अपने घर से करें, उनसे उनके बड़े-बुजुर्ग और अन्य लोग भी सीखने लग जाएंगे। कुछ करने के लिए जुनून होना चाहिए, जुनून के लिए प्रेरणा की जरूरत होती है। भारत विश्व गुरु तभी बन पाएगा जब हम जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। इन परिवर्तनों में ऊर्जा सरंक्षण और प्रकृति सरंक्षण महत्वपूर्ण विषय हैं और किस विषय में कितना जानना है, यह विद्यार्थी को खुद सोचना होगा। इनके अतिरिक्त 50 साल के बाद जीवन मुश्किल न हो जाए, इस पर विचार भी ज़रूरी है। केवल अच्छे पैकेज लेना ही नहीं बल्कि दुनिया को कुछ देना आवश्यक है। पचपन हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके प्रो. सोलंकी ने अपने जीवन को प्रेरणास्पद बना दिया है। उन्होंने एक सोलर बस का निर्माण किया है, जिसमें वे स्वयं रहते भी हैं।
विद्यापीठ की ओर से समन्वयक डॉ. चंद्रेश छतलानी ने बताया कि विद्यापीठ पिछले दो वर्षों से प्रो. सोलंकी के ऊर्जा स्वराज मिशन से जुड़ा हुआ है। ऊर्जा साक्षरता कार्यक्रम में बारह सौ से अधिक विद्यार्थियों व कार्यकर्ताओं ने पंजीकरण भी किया है तथा उनके कार्यक्रम रिंकल अच्छे हैं! में भी भागीदारी की गई है।
प्रारम्भ में स्वागत अधिष्ठाता व निदेशक प्रो. मंजू मांडोत ने किया, आभार डॉ. भारत सिंह देवड़ा ने जताया।
कार्यक्रम में डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. यज्ञ आमेटा, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. दिलीप चौधरी, डॉ. भरत सुखवाल, डॉ. ललित सालवी, विकास डांगी सहित विद्यार्थी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।
केवल अच्छे पैकेज लेना ही जरूरी नहीं बल्कि दुनिया को कुछ देना भी जरूरी है – प्रो. सारंगदेवोत
