इंद्रधनुष-2024 ग्रीष्मकालीन शिविर का समापन

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मन मोहा, सुन्दर-कलात्मक वस्तुओं की प्रदर्शनी रही आकर्षण का केन्द्र
उदयपुर, 30 मई। सीसीआरटी क्षेत्रीय केन्द्र उदयपुर एवं भारतीय लोक कला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर रंगारंग प्रस्तुतियां हुई।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसम्पर्क उप निदेशक गौरीकांत शर्मा, विशिष्ट अतिथि मुख्य आयोजना अधिकारी पुनीत शर्मा रहे। मुख्य अतिथि गौरीकांत शर्मा ने कहा कि इस 10 दिवसीय शिविर में बच्चों द्वारा बहुत ही सुन्दर और कलात्मक वस्तुओं की प्रदर्शनी देखकर मैं अचंभित हूँ और खुश भी कि इतने कम समय में बच्चों ने लगन और मेहनत से सुंदर कलाकृतियां एवं शिल्प का निर्माण किया गया। शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों को बहुत-बहुत बधाई। पुनीत शर्मा ने भी आयोजन की सराहना की और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे आयोजनों को उपयोगी बताया।
सीसीआरटी के परामर्शक ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि बच्चों में समेकित शिक्षा के प्रसार के उद्देश्य को लेकर भारतीय लोक कला मण्डल में 7 से 16 वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चों के लिए 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर “इंद्रधनुष -2024” का आयोजन भारतीय लोक कला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया जिसमें लगभग 100 बच्चों ने अपना पंजीयन कराया। शर्मा ने 10 दिवसीय शिविर में भाग लेने वाले बच्चों की विविध गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आशा है यहां पर सीखे विविध शिल्पों को घर पर भी बनाने का प्रयास करेगें। इसके लिए उन्होंने सभी अभिभावकों का आभार जताया। भारतीय लोक कला मण्डल उदयपुर के निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि यहां प्राप्त प्रशिक्षण का भविष्य में बेहतर उपयोग करते हुए अपने हुनर को बढ़ावा दे। उन्होंने कला मण्डल की उपलब्धियों एवं गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी।
‘‘बच्चों का झगड़ा’’नाटक ने किया प्रभावित
समापन अवसर प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक प्रबुद्ध पाण्डे द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘‘बच्चों का झगड़ा’’ का मंचन हुआ। नाटक की कहानी कुछ इस तरह थी कि दो बच्चे खेलते हुए आपस में झगड़ जाते है और झगड़ा इतना बढ़ जाता है। बात माता-पिता तक पहुँच जाती है वो भी आपस में झगडनें लगते है थोड़ी देर बाद दोनों बच्चे आपस में खेलते हुए नज़र आते है। जिस पर घर के बड़े बुजुर्गों द्वारा दोनों परिवार को समझाते हुए कहा जाता है कि बच्चे तो बच्चे है इनके पिछे बड़ो को नहीं झगड़ना चाहिए।
प्रदर्शनी में दिखा उत्साह
इसके पश्चात शिविर में लोक नृत्यों की प्रशिक्षक श्रीमती शिप्रा चटर्जी द्वारा निर्देशित लोक नृत्यों की बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी। जिस पर दर्शकों ने जोरदार तालियों से बच्चों का उत्सावर्धन किया। शिविर में पुतली प्रशिक्षक मोहन डांगी द्वारा बच्चों को दस्ताना पुतली बनाने का प्रशिक्षण दिया गया जिसमें बच्चों द्वारा दस्ताना पुतली का निर्माण किया गया है जिसकी प्रदर्शनी लगाई गई इसके साथ ही आर्ट एण्ड काफ्ट्र के तहत सुश्री पंकज मालवीया, सीमा कंठालिया एवं मोहम्मद समीर द्वारा बच्चों को विभिन्न शिल्पों से अवगत कराते हुए उन्हें बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। जिसमें प्राकृतिक अपशिष्ट से बने खिलौने, पेंड-पौधों, फल, सब्जियों के छिलके, बीज, अनाज एवं दालों से खिलौने आदि की प्रदर्शनी

By Udaipurviews

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