भारतीय इतिहास का युग निर्धारण विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन
भारतीय इतिहास लेखन तथा युग निर्धारण (काल गणना) का पुनः निरीक्षण आवश्यक: शारंगधर सिंह परिहार
उदयपुर 30 नवम्बर / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय, अक्षय लोकजन, ग्लोबल हिस्ट्री फोरम के संयुक्त तत्वावधान में विद्यापीठ के प्रतापनगर स्थित कुलपति सचिवालय के सभागार में भारतीय इतिहास लेखन तथा युग निर्धारण विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया । मुख्य अतिथि बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा के मुख्य न्यायाधीश शारंगधर सिंह परिहार, विशिष्ट अतिथि लक्ष्मण सिंह कर्णावट थे जबकि अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने की।
मुख्य अतिथि शारंगधर सिंह परिहार ने कहा कि पिछले वर्षों में अन्तराष्ट्रीय स्तर पर सनातन, धर्म, संस्कृति, पुरातत्व सम्बन्धी संग्रहालयों, पुस्तकालयों आदि का अध्ययन करने के साथ यूरोपीय और भारतीय विद्वानों द्वारा लिखित ऐतिहासिक विसंगतियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सदियों से विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं का पालना (झूला) रहा है, इसलिये हमारे देश के इतिहास को सिन्धु – सरस्वती सभ्यता से लेकर मनवन्तर – सप्तऋषि कलेण्डर, युधिष्ठिर कलेण्डर, विक्रम-संवत, शक-संवत, हर्ष-संवत, शालीवाहन-संवत इत्यादि के परिप्रेक्ष्य में भारतीय इतिहास में युग निर्धारण एवं काल गणना, वैदिक एवं प्रचलित पंचागों पर आधारित होना चाहिये। परिहार ने बताया कि जिस तरह विश्व में समय की गणना औपनिवेशिक काल में इंग्लैण्ड के ग्रीनविच (स्टेण्डर्ड समय) को आधार मानते हुए की जाती है जो नितान्त यूरोपीय दृष्टिकोण है इसी दृष्टि से भारतीय इतिहास का समय (स्टेण्डर्ड समय) निर्धारण भारतीय ऐतिहासिक मानदण्डों के अनुसार होने की बात कही।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय, संस्कृति, परम्परा, विरासत विश्व विख्यात है, इसे तर्काे के साथ पुनर्लेखन की जरूरत है। भारतीय गणना का कोई सानी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे इतिहास को तोड़-मरोड़़ कर लिखा गया है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी जो सूर्य की परिक्रमा करती है उसकी सटीक परिभ्रमण गति को भी पृथ्वी की दैनिन्दिन गति के रूप में आर्य भट्ट ने 2000 वर्ष पूर्व आर्य भटट्ीय में दिया था। प्राचीन काल से ही भारतीयों को यह ज्ञान था कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती हैै।
प्रारंभ में आयोजन सचिव डॉ. अजात शत्रु शिवरती ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एक दिवसीय संगोष्ठी की जानकारी देते हुए बताया कि शारंगधर सिंह परिहार बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा के मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत हुए हैं, साथ ही ये लोक नायक जय प्रकाश नारायण के करीबी रहे तथा मेवाड़ के महाराणा प्रताप के भ्राता महाराज शक्तिसिंह के वंशज 1857 की क्रान्ति के अन्तिम क्रान्तिकारी बिहार के कुंवर सिंह के परिवार के सदस्य भी है।
इस अवसर पर ग्लोबल हिस्ट्री फोरम के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. जी.एल. मेनारिया, जयकिशन चौबे, पूर्व बार अध्यक्ष एडवोकेट शंभू सिंह राठौड, एडवोकेट नरपत सिंह चुण्डावत, डॉ. अजात शत्रु शिवरती, उग्रसेन राव, इन्द्रसिंह झोलावास, गणेशलाल नागदा, ओम माली, हरीश तलरेजा, रामसिंह राठौड़, अविनाश, शहर के साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
संचालन जयकिशन चौबे ने किया जबकि आभार डॉ. कुल शेखर व्यास ने जताया। यह जानकारी निजी सचिव कृष्णकांत कुमावत ने दी।
