उदयपुर, 2 सितम्बर। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में चातुर्मास में कर रहे पंन्यास प्रवर निरागरत्न विजय जी म.सा. ने पर्युषण पर्व के तीसरे दिन सोमवार को धर्मसभा में पूरे वर्ष करने योग्य 11 कर्तव्य का जिक्र करते हुए कहा कहा कि जो मुख्य होते हैं उन्हें प्रथम पंक्ति में बिठाया जाता है। बुरे कार्य करना वो अधर्म है वैसे अच्छे कार्य की उपेक्षा करना भी अधर्म है। अपने निमित्त से कोई साधर्मिक संघ से दूर होवे, अनंत संसार हमारा बढ़ जाएगा। हमारे ये कर्तव्य अनुबंध वाले यानि फल की परम्परा वाले बने उसके लिए पांच रिक्वायरमेंट है-अटैचमेंट, अटेªक्शन, अटेम्पट, अटेंशन। कोई भी धर्म क्रिया करो वो दीर्घ काल, निरन्तर और ससत्कार करो। साथ ही 11 कर्तव्यों का पालन करो जिसमें संघ पूजा, साधर्मिक भक्ति, सामायिक, स्नात्र महोत्सव, देव द्रव्य वृद्धि, महापूजा, रात्रि जागरण, श्रुत भक्ति, उजमणा, शासन प्रभावना व आलोचना। जिनशासन का सबसे बड़ा उपकार की हमें पापों से बचाया। चातुर्मास प्रवक्ता राजेश जवेरिया ने बताया कि पर्युषण में श्रावक-श्राविकाओं की तपस्याओं का लड़ी लगी हुई है। पर्युषण पर्व में पंन्यास प्रवर के दर्शन-वंदन हेतु भारत वर्ष से श्रावक-श्राविकाएं उदयपुर आए है। निरन्तर सामायिक, त्याग-तपस्याओं का क्रम बना हुआ है। सभी के आवास-निवास की समुचित व्यवस्था की गई है।
अच्छे कार्य की उपेक्षा करना भी अधर्म है : निरागरत्न
