जीवन मिला है तो सिर्फ सोचो मत, खुद को साबित करो: आचार्य विजयराज

उदयपुर, 25 जुलाई। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास में गुरूवार को धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने कहा कि सही दिशा में किया गया पुरूषार्थ उपलब्धिपरक होता है। भगवान महावीर ने पुरूषार्थ करने पर बहुत बल दिया। दीक्षा लेते ही साढ़े बारह वर्ष तक मौन रह कर जप-तप एवं सतत साधना की। निश्चय नय की दृष्टि से अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत चारित्र एवं अनंत आनंद व तप आत्मा का स्वाभाविक गुण है। इन पर पड़े आवरण को हटाने के लिए निरन्तर पुरूषार्थ किया जाता रहे तो सिद्धि दूर नहीं है। जीवन मिला है तो सिर्फ सोचो मत, खुद को साबित करो। मनुष्य साबित करने का संकल्प कर ले तो वह अपनी सोच को साकार कर देता है। संकल्प को क्रियान्वित करने वाला सफलता सहित सबकुछ प्राप्त कर लेता है। आगम शब्द की व्याख्या करते हुए आ = आओ, ग = गम को, म = मिटाने के लिए। अपने गम को मिटाने के लिए आगम की शरण लेकर चिंतन, मनन कर उसकी शिक्षाओं को जीवन में उतारने की सीख दी। उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि अगर कोई स्वधर्मी या अतिथि आपके घर आता है तो मधुर वाणी के साथ जलपान, आहार आदि के द्वारा उनकी मान मनुहार करें क्योंकि भारतीय संस्कृति में कहा है-अतिथि देवो भव! अगर आप प्रेम से किसी को भोजन कराते हो तो वह जिंदगी भर नहीं भूलता। श्रद्धेय श्री रत्नेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि धन की गति तीन है-दान, भोग और नाश। पुण्योपार्जन करना है तो दान देकर धन का सदुपयोग करें। मीडिया प्रभारी डॉ. हंसा हिंगड़ ने बताया कि चैन्नई, रायपुर, खाचरोद, किशनगढ़, ब्यावर, बीकानेर, बैंगलोर के अनेक श्रद्धालुओं ने दर्शन, वंदन, प्रवचन श्रवण कर आतिथ्य सेवा का आनंद लिया। एक उपवास से लेकर अट्ठाई तप की तपस्या कई श्रद्धालुओं के जारी है।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!