उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने चातुर्मास के अवसर पर प्रातः कालीन धर्म सभा में कहा कि आज से नवरात्रि महापर्व प्रारंभ हो गया है। इस पर्व में निरन्तर साधना आराधना करने से जीवन में नवीनता आती है। जिसके जीवन में नवीनता नहीं होती है उसके जीवन का कल्याण भी नहीं हो सकता हैं। जीवन का कल्याण और आत्मा का कल्याण करने के लिए जीवन में हमेशा धर्म ध्यान और तप साधना की नवीनता का होना जरूरी है।
जीवन में एकरूपता और समता भाव जागृत करने के लिए नवीन सा बहुत ही जरूरी है। जिसके मन में श्रद्धा भाव नहीं है उनका धर्म ध्यान भी सफल नहीं हो पाता है। जीवन में श्रेष्ठ और पवित्रता तभी आएगी जब आपके मन में श्रद्धा भाव होगा। संसार में सर्वश्रेष्ठ मानव जीवन ही है। हमें लगातार इसके उत्थान और कल्याण के लिए प्रयास करने चाहिए। आप धर्म ध्यान कर रहे हैं, माला जाप कर रहे हैं, लेकिन आपका भाव माला जाप में नहीं होकर परिवार और आपके व्यापार में लगा हुआ है तो वह धर्म आराधना आपकी सफल नहीं होगी। लोग कहते हैं कि हम धर्म आराधना करते हैं फिर भी हमारे कार्य सिद्ध नहीं होते है। कार्य सिद्ध नहीं होने का मूल कारण ही यह है कि हमारा मन स्थिर नहीं है। धर्म आराधना तो हम कर रहे हैं लेकिन उसमें हमारा श्रद्धा भाव नहीं है। धर्म आराधना में बिना श्रद्धा और भाव के कोई भी कार्य की सिद्धि नहीं हो सकती है। इसलिए धर्म के प्रति हमेशा श्रद्धावान रहे, आस्थावान रहे और अपनी भावनाओं को शुद्ध रखें।
उप प्रवर्तक अमृत मुनिश्री ने कहा कि जो श्रावक श्राविकाएं श्रद्धा पूर्वक धर्म ध्यान करते हैं उनका छोटा काम भी बड़ा हो जाता है। श्रद्धावान व्यक्ति ही जीवन में आगे बढ़ पाता है। बिना श्रद्धा के संसार में किसी का भी कल्याण नहीं हो सकता।
मुनीश्री ने कहा कि जीवन निर्माण के लिए जीवन में समता भाव का होना जरूरी है। जिसके जीवन में सुनीता है उसमें तपोवल की भी क्षमता है। धर्म साधना के कई स्वरूप होते हैं। जिस स्वरुप का भाव अपने में उत्पन्न हो वही स्वरूप लेकर उधर महाराज ना करनी चाहिए। बिना धर्म आराधना के जीवन कभी सफल नहीं होता है।
डॉ.वरुण मुनि ने धर्म सभा में कहा कि भगवान महावीर के साधना का में बड़ी-बड़ी बाधाएं और विघ्न आए लेकिन वह अपने साधना मार्ग से कभी डिगे नहीं, हमेशा सहिष्णु बनकर रहे, समता भाव उन्होंने धारण किया तभी जाकर उनकी साधना पूर्ण हुई। उन्होंने श्रावक श्राविकाओं को प्रेरणा देते हुए कहा कि जो अपने जीवन में साधना का मार्ग अपनाते हैं उनके साथ कई बाधाएं आती है, कई विघ्न आते हैं लेकिन उस दौरान अगर आप विचलित हो गए तो आपकी साधना कभी पूर्ण नहीं होगी। विघ्न बाधाओ में भी अडिग रहना ही साधना है।
धर्म सभा का संचालन करते हुए महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि इस चातुर्मास काल में लगातार नवकार महामंत्र के जाप्यानुष्ठान चल रहे हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाओं का आना निरंतर जारी है। रविवार को भी कई गुरु भक्त मुनि श्री सुकन मुनि जी का आशीर्वाद लेने पहुंचे। धर्म सभा में उनका स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्म सभा में अखिलेश मुनि ने सुंदर गीतिका का प्रस्तुत की।
जिसके जीवन में नवीनता नहीं तो उसके जीवन का कल्याण भी नहींःसुकनमुनि
