‘राजकीय प्रयास नहीं, अपितु जन के मन में भाव जागरण से होगा विरासत संरक्षण

-भारतीय इतिहास संकलन समिति की संगोष्ठी में बोले वक्ता
उदयपुर, 7 मार्च। धरोहर संरक्षण किसी राजकीय प्रयास के माध्यम से सुरक्षित नहीं रह सकता, इसके लिए जनसमुदाय को आगे आना होगा।
यह बात मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष प्रो. मीना गौड़ ने कही। वे शनिवार को यहां भारतीय इतिहास संकलन समिति, उदयपुर की ओर से ‘धरोहर संरक्षण हमारी प्राथमिकता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उद्बोधन दे रहीं थीं। उन्होंने कहा कि धरोहर एक भाव है, इसके संरक्षण का भाव भी जगाना होगा। इसके लिए जनजागरूकता के प्रयास करने होंगे।
होली मिलन के उपलक्ष्य में रखी गई इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता मंगलायतन विश्वविद्यालय, मथुरा के कुलपति प्रो. परमेन्द्र दशोरा ने कहा कि सिर्फ पाषाण कलाकृतियां ही विरासत नहीं हैं, अपितु हमारी परम्पराएं भी हमारी विरासत हैं। चाहे विवाह के समय शीतलामाता पूजन हो अथवा तीरथ पर जाते-आते पथवारी पूजन हो, यह सभी परम्पराएं हमारी विरासत हैं। समय के साथ इनमें परिवर्तन हुआ है, लेकिन इनकी प्राचीनता ही इन्हें विरासत सिद्ध करती है। परम्पराओं में युगानुकूल परिवर्तन प्राचीन समय के साथ होता आया है और अब भी जारी है। जिम्मेदारी यह है कि परम्परा में छिपे संदेश को समझना और समझाना।
हिरण मगरी स्थित विश्व संवाद केन्द्र के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान विद्यापीठ साहित्य संस्थान के निदेशक प्रो. जीवनसिंह खरकवाल ने की। जिला महामंत्री चैनशंकर दशोरा ने भी विचार रखे।
अतिथियों का स्वागत चित्तौड़ प्रांत के मंत्री डॉ. मनीष श्रीमाली ने किया। संचालन इतिहास संकलन समिति की उदयपुर महानगर इकाई के अध्यक्ष डॉ. महामायाप्रसाद चौबीसा व धन्यवाद महानगर मंत्री दीपक शर्मा ने ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रांतीय संगठन मंत्री रमेश शुक्ला, गौरी शंकर दवे, प्रमोद शर्मा आदि गणमान्य उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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