उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की और से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनी महाराज के सानिध्य में महेश मुनि महाराज की जयंती एवं डॉ अमरेेश मुनि निराला म.सा.की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर उनका गुणगान और गुणानुवाद किया गया।
प्रातः कालीन धर्म सभा में अमरेश मुनि का गुणगान करते हुए सुकन मुनि महाराज ने कहा कि वह एक महान संत थे। उनका जीवन हमेशा ही प्रेरणादायी रहा है और रहेगा। उनकी कथनी और करनी में कभी भी अंतर नहीं रहा। वह स्पष्ट वक्ता के तौर पर जाने जाते थे। वह जो भी कहते थे सबके सामने और डंके की चोट पर रहते थे। वह स्पष्ट वक्ता के साथ ही गजब के साहित्यकार थे। अपनी छोटी सी उम्र में ही उन्होंने जिनशासन के लिए बहुत कुछ किया। उनकी धर्म आराधना उनके तप और त्याग अमर है। कैंसर जैसे गंभीर और भयानक रोग से जूझते हुए भी कभी भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ऐसे गंभीर रोग से पीड़ित होने के बावजूद वह अपने संकल्पों पर हमेशा अडिग रहे। जो संसार में आया है उन्हें एक दिन संसार छोड़कर जरूर जाना है लेकिन हम आप और दुनिया उन्ह ही याद करती है जिनके कार्य और कर्म महान होते हैं। डॉ अमरेश मुनि भी उन महापुरुषों में से एक थे। उनकी कार्यशैली उनकी स्पष्ट वादीता और उनके कुशल मंच संचालन की क्षमता हमेशा ही अविस्मरणीय रहेगी।
मुनिश्री ने कहा कि आज ही के दिन महेश मुनि महाराज का भी जन्मदिन है। यह युवा संत है। युवाओं के लिए हमेशा ही यह प्रेरणादायी रहे हैं और आज भी है। यह सुमधूर गायक के साथ ही कुशल प्रवचकार भी है। सुकन मुनि जी ने यह कहते हुए उन्हें अपनी ओर से दीर्घायु एवं शतायु होने का आशीर्वाद दिया।
डॉ वरुण मुनि ने डॉ. अमरेेश मुनि को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने उदयपुर में दो चातुर्मास किए थे। वह प्रज्ञाशील कुशल मंच संचालक तो थे ही साथ ही वह अपनी कार्य शैली और अपनी विद्वता को लेकर सबके दिलों पर राज करने वाले थे। उनके सामने चाहे कोई छोटा जाता हो या बड़ा जाता हो सभी पर सामान प्रेम और वात्सल्य लूटाते थे। वह सभी धर्म के प्रति समान व्यवहार करते थे। उनके अंतिम दिनों के समय जब वह अस्पताल में उपचार रत थे तब गुरुदेव सुकन मुनि जी उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने अस्पताल पहुंचे। रोग की गंभीर वेदना को झेलने के बावजूद उन्होंने गुरुदेव से कहा कि हे गुरुदेव, आपने अस्पताल आने की तकलीफ क्योंकि मैं स्वयं आपके श्री चरणों में हाजिर हो जाता। उन्होंने कहा कि आप चिंता ना करें मैं शीघ्र ही स्वस्थ होकर फिर से आपके सानिध्य में धर्म आराधना करने आऊंगा, लेकिन उनका अंतिम समय आ गया और वह मोक्ष को प्राप्त हो गए।
इस अवसर पर महेश मुनि जी का जन्मदिन भी था। उनको भी उन्होंने दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन होने की मंगल कामनाएं प्रदान की। महेश मुनि जी ने भी एक सुंदर गीतिका के माध्यम से डॉक्टर अमरेेश मुनि को भावाभिव्यक्ति प्रदान की। इसके बाद कई श्रावकों ने डॉक्टर अवधेश मुनि जी को याद करते हुए उनका गुणगान किया।
महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने इस अवसर पर कहा कि मृत्यु का शौक तो हम सांसारिक जीवन में रहने वाले करते हैं, लेकिन जब संतों का देवलोक गमन होता है तो उनका शौक नहीं उनका महोत्सव मनाया जाता है। डॉ. अमरेश मुनि हमारे लिए हमेशा प्रेरणादायी बने रहेंगे। धर्म सभा में बाहर से भी कई श्रावक श्राविकाओं का आना लगातार जारी है। सोमवार को भी कई श्रावक श्राविकाए देश के विभिन्न क्षेत्रों से संतों का आशीर्वाद लेने पहुंचे। जिनका श्रावक की ओर से स्वागत अभिनंदन किया गया।
महेश मुनि महाराज की जयंती एवं डॉ अमरेेश मुनि निराला म.सा.की पुण्यतिथि पर गुणानुवाद सभा आयोजित
