-सांसद सीपी जोशी, चुन्नीलाल गरासिया, डॉ. मन्नालाल रावत, विधायक ताराचंद जैन और फूलसिंह मीणा होंगे विशिष्ट अतिथि, आज दोपहर 3 बजे बाद निःशुल्क प्रवेश
महोत्सव में रविवार को आएंगे केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन गजेंद्र सिंह शेखावत
उदयपुर, 20 दिसम्बर। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा विश्व प्रसिद्ध शिल्पग्राम महोत्सव का आगाज शनिवार 21 दिसंबर को होगा। मुख्य अतिथि राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ किशनराव बागडे शनिवार की शाम को महोत्सव का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद 10 दिन यानी 30 दिसंबर तक ‘लोक के रंग-लोक के संग’ थीम पर यह उत्सव मेवाड़-प्रदेश-देश-विदेश के लोक कला एवं संस्कृति प्रेमियों के भरपूर मनोरंजन के साथ ही लोक संस्कृतियों के विषय में ज्ञानवर्द्धन भी करेगा। इस अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि सांसद श्री सीपी जोशी, श्री चुन्नी लाल गरासिया और श्री मन्नालाल रावत तथा विधायक श्री ताराचंद जैन और श्री फूलसिंह मीणा भी मौजूद रहेंगे।
गवर्नर हरिभाऊ किशनराव बागडे शनिवार शाम छह बजे शिल्पग्राम पहुंचेंगे। वे गोल्फ क्राफ्ट के माध्यम से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद विशिष्ट अतिथियों के साथ मुक्ताकाशी मंच पर दीप प्रज्वलन कर महोत्सव का उद्घाटन तथा संविधान की प्रस्तावना का वाचन करेंगे। इसके बाद वे समारोह को संबोधित करेंगे और लोक संस्कृति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखेंगे। इससे पूर्व पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक फुरकान खान अतिथियों का स्वागत करेंगे।
गवर्नर प्रदान करेंगे डॉ. कोमल कोठारी लाइफ टाइम अचीवमेंट लोक कला पुरस्कार –
राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे समारोह में डॉ. रूप सिंह शेखावत (भवाई लोक नृत्य) और गणपत सखाराम मसगे (कठपुतली एवं चित्रकला) को डॉ. कोमल कोठारी लाइफ टाइम अचीवमेंट लोक कला पुरस्कार प्रदान करेंगे। इस पुरस्कार में प्रत्येक को एक रजत पट्टिका के साथ 2.51 लाख रुपए की राशि प्रदान की जाएगी।
पहले दिन दोपहर 3 बजे बाद निशुल्क प्रवेश –
शिल्पग्राम महोत्सव में शनिवार (21 दिसंबर) दोपहर 3 बजे बाद मेलार्थियों के लिए निशुल्क प्रवेश रहेगा।
केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत कल आएंगे-
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत रविवार को शिल्पग्राम महोत्सव में आएंगे। वे दोपहर 2ः30 बजे शिल्पग्राम आएंगे। वे शिल्पग्राम का दौरा करेंगे।
आज की प्रस्तुतियां-
शनिवार शाम को मुक्ताकाशी मंत्र पर उद्घाटन समारोह में…रिदम ऑफ इंडिया-म्यूजिकल सिंफनी, कोरियोग्राफ- लोक नृत्य प्रस्तुति-फोक फ्यूजन, लोक नृत्य प्रस्तुतियां…, -मणिपुरी ‘थौगोऊ जागोई’ नृत्य, रौफ-कश्मीर डांस, चरी-राजस्थान, -राठवा-गुजरात,-तलवार रास-गुजरात -देखणी-गोवा आदि प्रस्तुतियां होंगी।
लोक नृत्य तलवार रास शहादतों और रौफ देता है खुशहाली का संदेश
उदयपुर, 20 दिसम्बर। शिल्पग्राम महोत्सव में शनिवार को मुक्ताकाशी मंच पर कश्मीर का रौफ और गुजरात का तलवार रास लोक नृत्य अपनी खास पहचान ही नहीं रखते, बल्कि दर्शकों के दिलो दिमाग पर अपनी अलग ही छाप छोड़ते हैं।
तलवार रास –
इस लोक नृत्य में चाहे ‘रास’ यानी ‘रस’ जुड़ा हो, लेकिन इसके मायने ‘वीर रस’ से है। यह डांस अंग्रेजों के खिलाफ दिए गए क्रांतिकारियों के बलिदान की याद दिलाता है। बताते हैं पोरबंदर के पास बाडो पर्वत की तलहटी के वीर मानेक ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजाया था। उन्होंने अपनी छोटी सी वीरों की टुकड़ी से अंग्रेजों से युद्ध किया और विजय प्राप्त की। इस युद्ध में उन्होंने तलवार और ढाल का इतने कौशल से प्रयोग किया कि अंग्रेजों को घुटने टेकने पड़े। यह युद्ध साल 1591 में भूचर मोरी में हुआ था। इस युद्ध में शहीद हुए राजपूत वीरों का कौशल प्रदर्शित करने के लिए तलवार-ढाल लेकर लोक नृत्य किया जाता है। यह तलवार रास नृत्य कहलाता है। इसमें 10 डांसर युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हैं। इन डांसर्स की वेशभूषा में केडिया (लहंगा), मेहर पगड़ी, खेस (कंधे पर दुपट्टा) और हाथ में तलवार और ढाल होते हैं।
रौफ यानी बुमरो-बुमरो श्याम रंग बुमरो-
बॉलीवुड का हिट गाना बुमरो-बुमरो श्याम रंग बुमरो, हर कला प्रेमी देख-सुन चुका है। रौफ डांस को यह लोक गीत खूब लोकप्रिय बना रहा है। टीम लीडर गुलजार अहमद बट बताते हैं, ‘कश्मीर का यह फोक डांस खुशी के मौकों पर पेश करने की परंपरा है यानी दिवाली, बैसाखी, ईद सहित तमाम खुशी के मौकों पर यह डांस पेश किया जाता है।’ इसमें बुमरो का अर्थ है भंवरा है, यह श्याम रंग के भंवरे पर यह गीत है। गुलजार ने बताया कि यह डांस सिर्फ युवतियां करती हैं। वेशभूषा में कश्मीरी फहरन, ज्वेलरी, सलवार आदि पहनती हैं। इसमें खास वाद्ययंत्रों- रबाब, सारंगी, तुमबकनारी, नूट (मटना), हारमोनियम और संतूर का प्रयोग होता है।
