हास्ययोग को भविष्य का योग होगा
उदयपुर। गुरु जितेन कोही द्वारा संचालित हास्ययोग केंद्र उदयपुर में पहली बार चार दिवसीय 11वां अखिल भारतीय हास्ययोग सम्मेलन का 1 अक्टूबर से बड़गांव स्थित स्पेक्ट्रम रिज़ॉर्ट में आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम समन्वयक प्रणिता तलेसरा ने बताया कि हास्य योग केन्द्र की स्थापना हंसी के मंथन की अनूठी अवधारणा गुरुजी के गहन शोध और कड़ी मेहनत का परिणाम है और इसके अभ्यासकर्ताओं को अत्यधिक खुशी और स्वास्थ्य प्रदान करती है। इस सम्मेलन में पूरे भारत से 500 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। अब तक सभी का पंजीकरण हो चुका है।
उन्होंने बताया कि शिविरार्थी पीले एवं सफेद वस्त्र धारण किये होंगे। सम्मेलन में प्रतिदिन गुरू जितेन कोही द्वारा हास्य योग सत्र का आयोजन होगा। जिसमें आचमन,आचरण, हास्यासन, संवर्धन ,ध्यान एवं मौन पर कार्यक्रम होगा। इसके अलावा विहंगम हास्य ध्यान व सत्चित आनंद क्रियायोग,विभिन्न स्थानों के हास्ययोग शिक्षकों,या क्लबों के अनुभवों से साक्षात्कार कराया जायेगा।
श्रीमती तलेसरा ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा, योग,खान पान,एम्यूप्रेशर एवं हैप्पीनेस पर कार्यशालायें का आयोजन होगा। जलयोग एवं जुम्बा व गुरूजी द्वारा हास्यामृतपान ध्यान पर विशेष क्रियाएं करायी जायेगी। सम्मेलन के समापन पर शिविरार्थियों को उदयपुर दर्शन कराया जायेगा।
सम्मेलन में गुरूजी द्वारा इस 11वें सम्मेलन का उद्देश्य हास्ययोग पर कार्य कर रहे विभिन्न लोगों को एक सांझा मंच प्रदान करना व हास्ययोग के परिष्कृत रूप का प्रचार-प्रसार करना है । इस सम्मेलन में हास्ययोग के साथ-साथ प्राणायाम, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्युप्रेशर, हास्यध्यान, मौन -जप पर कार्यशालाओं का आयोजन होगा।
हास्ययोग की आवश्यकता-लोग प्रतिदिन योगासन, ध्यान, प्राणायाम आदि सब कुछ कर रहे हैं किन्तु तब भी वे खुश व हँसमुख नहीं हैं क्यों? तनाव, असंतोष, असुरक्षा की भावना, वर्तमान को जीने के बजाय भविष्य के लिए जीना और और पैसा कमानें की होड़, यह सारा असंतोष परिवार -ऑफिस-घर-सड़क पर निकल रहा है और ऐसा इसलिए हो रहा है कि हम हँसना भूल गए हैं।
90 प्रतिशत से ज्यादा लोग शारीरिक कम मानसिक रुप से ज्यादा बीमार हैं। अधिकतर बीमारियों का प्रमुख कारण है बढ़ता मानसिक दवाब यानि तनाव । शूगर, उच्च रक्तचाप, मोटापा, डिप्रेशन, जोड़ों के दर्द, सरवाईकल, माइग्रेन, गैस, एलर्जी, अस्थमा, कैंसर आदि अनेकानेक बीमारियों की संख्या में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी हो रही है। विज्ञान जगत नित नई खोजों के बावजूद बीमारियों पर अंकुश लगा पाने तथा पूर्णतः समाप्त कर पाने में अक्षम साबित हो रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे जीवन से निश्छल-निर्मल हँसी दूर होती जा रही है।
योग व हास्य के मंथन से उपजा हास्ययोग सरल, सरस लाभकारी भी है और मंनोरजक व आनंददायक भी। सात साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक कोई भी इसे आसानी से अपना सकता है । इसीलिए हास्ययोग को भविष्य का योग कहा जाता है।
हास्ययोग सम्मेलन का महत्व कैसे भी हँसना या कुछ भी करके हँसना हास्य है, हास्ययोग नहीं। मुस्कुराना और हँसना दो अलग-अलग क्रियाएं है। मुस्कुराना एक मानसिक क्रिया है व हँसना मानसिक व शारीरिक दोनों क्रिया है।
पार्कों में आधा-एक घण्टा हँस लेना हास्ययोग नहीं है। जब तक हम उस हास्य भाव को आत्मसात् कर स्नेह और प्रेम का मानवीय भाव अर्जित नहीं कर पाते। योग की भारतीय परपंरा के अनुसार हास्ययोग का संवर्धन हो । योग व हास्य के मंथन से उत्पन्न हास्ययोग भारत की पावन धरती की देन है। हास्य योग केन्द्र द्वारा अब तक ऋषिकेश,माउण्ट आबू, पंचमढ़ी, कुरूक्षेत्र, जयपुर,उज्जैन,चित्रकूट, कसौली, कार्वेट व अयोध्या मे ंआयोजित किये जा चुके है।
चार दिवसीय 11वां अखिल भारतीय हास्ययोग सम्मेलन 1 से स्पेक्ट्रम रिजॉर्ट में
