सांपों को भी दूध पिलाना भारतीय संस्कृति – डॉ संयमलता

उदयपुर। नागपंचमी पर प्रवचन करते हुए साध्वी डॉ.संयमलता ने कहा कि नाग पूजा का इतिहास छः हजार वर्ष से भी प्राचीन है। जैन धर्म में नाग का महत्व व किस किस महापुरुषों की रक्षा सांपों द्वारा की गई सव्याख्या बताते हुए कहा कि सांपों को भी दूध पिलाना भारतीय संस्कृति है, वर्ल्ड में मात्र भारतीय संस्कृति ऐसे ही जहां साँपों को भी दूध पिलाना एक पुण्य व धर्म का कार्य समझा जाता है,पर आज विडंबना ऐसी है कि मानव अपनी मौज मस्ती के लिए निरपराध पशुओं व जानवरों की हत्या करता है जो कि सही नहीं है।
जैन शास्त्र “भगवती सूत्र” में सांपों का जीवन वृत सुनाते हुए बताया कि प्रत्येक नाग विषधर नहीं होता है। 23 वें तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ के जीवन वृत का उल्लेख करते हुए बताया कि पूर्वभव में उन्होंने एक लकड़ में से साँप का जोडा अग्नि में से सुरक्षित निकाला उसके फलस्वरुप भगवान् पार्श्वनाथ के साधना समय में धरणेन्द्र और माता पद्मावती ने उनकी रक्षा की थी।
उन्होंने कहा कि यह उत्सव प्रकृति-प्रेम को उजागर करता है । हमारी भारतीय संस्कृति हिंसक प्राणियों में भी अपना आत्मदेव निहारकर सद्भाव रखने की प्रेरणा देती है । नागपंचमी का यह उत्सव नागों की पूजा तथा स्तुति द्वारा नागों के प्रति नफरत व भय को आत्मिक प्रेम व निर्भयता में परिणत करने का संदेश देता है।
साध्वी सौरभप्रज्ञा ने कहा व्यक्ति अपनी सोच को निर्मल और सकारात्मक रखें। नगर पालिका की कचरा पेटी में भी उतना कचरा नहीं होता, जितना व्यक्ति के मन में कषाय रूपी  कचरा भरा है। मन की निर्मलता के साथ दृष्टि और वाणी को निर्मल रखेंगे तो जीवन का कायाकल्प होगा।
चातुर्मास समिति के संयोजक ललित लोढा ने जानकारी देते हुए बताया कि आज तृतीय शुक्रवार को भगवान् पार्ष्वनाथ – माँ पद्मावती के एकासन का आयोजन संपन्न हुआ है। जिसमें श्राविकाऐं बढचढ़ कर हिस्सा ले रही हैं।

By Udaipurviews

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