सतत कृषि हेतु उन्नत फसल विविधीकरण रणनीतियों पर किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 19 अगस्त 2026 महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयउदयपुर के अनुसंधान निदेशालय द्वारा फसल विविधीकरण परियोजना के अंतर्गत झाड़ोल तहसील में दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम “सतत कृषि हेतु उन्नत फसल विविधीकरण रणनीतियाँ” का शुभारंभ 19 अगस्त को किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम 19-20 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरणमृदा स्वास्थ्य संरक्षणप्राकृतिक खेतीखरपतवार एवं कीट प्रबंधन तथा खरीफ फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों के संबंध में व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम में डॉ. हरि सिंहपरियोजना प्रभारी ने किसानों को परियोजना के उद्देश्योंगतिविधियों एवं फसल विविधीकरण की आवश्यकता के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की जलवायुमृदा एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप फसल प्रणाली में विविधता अपनाकर उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. कुलदीप सुथार ने फसल विविधीकरण के माध्यम से फसलों में कीट एवं रोग नियंत्रण के महत्व तथा कीट एवं रोगों के समेकित प्रबंधन की विभिन्न विधियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को रसायन-मुक्त एवं सुरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किया।

श्री रतन लाल कुमारसहायक कृषि अधिकारी ने फसल विविधीकरण में मृदा स्वास्थ्य की भूमिका विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न फसलों को अपनानेफसल अवशेषों के उचित प्रबंधनजैविक पदार्थों के उपयोग तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन से मृदा की उर्वरता एवं उत्पादकता को बनाए रखा जा सकता है।

श्री पुष्कर पालीवालकृषि पर्यवेक्षक ने प्राकृतिक खेती विषय पर किसानों को संबोधित किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतोंस्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

सुश्री चीना डाबीकृषि पर्यवेक्षक ने खरपतवार प्रबंधन विषय पर किसानों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने खरीफ फसलों में प्रमुख खरपतवारों की पहचान तथा यांत्रिकसांस्कृतिक एवं रासायनिक विधियों द्वारा प्रभावी खरपतवार नियंत्रण की जानकारी प्रदान की।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने फसल उत्पादनकीट एवं रोग नियंत्रणमृदा स्वास्थ्यप्राकृतिक खेती तथा फसल विविधीकरण से संबंधित विभिन्न प्रश्न विशेषज्ञों से पूछेजिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में किसानों से कृषि में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए फसल विविधीकरण एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम दिन 30 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़कर उत्पादनआय एवं रोजगार में वृद्धि के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।

By Udaipurviews

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