उदयपुर। सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी विपुल प्रभा श्रीजी ने कहा कि परमात्मा के जरिये मोक्ष से कनेक्शन करना है। सुदेव, सुगुरु और सुधर्म। सु यानी सम्यकत्व। घर में कितने ही स्विच लगा लो, मेन लाइन से कनेक्ट नही करोगे तब तक लाइटें नही चलेगी। चिंतामणि जैसा यह अमूल्य जीवन मिला है। परमात्मा तो मोक्ष लक्ष्मी देना चाहते हैं पर आप धनलक्ष्मी से ही संतुष्ट हो इसलिए जब तक सही कनेक्शन नही होगा काम नहीं होगा। दूसरा करेक्शन यानी जहां गलत कनेक्शन हैं वहां करेक्शन करना है। परिवार, मोह, माया, क्रोध, लोभ से जुड़े हैं। इसका अहसास भी हो गया लेकिन इस कनेक्शन को करेक्ट नही करेंगे तब तक ऐसे ही रहेगा। किसी से बैर रखा तो पता नहीं कितने भव तक चलेगा और हम भटकते रहेंगे। उसे सही कर दो अभी ही ताकि आगे तक नहीं ले जाएं। कलेक्शन यानी क्या क्या इकट्ठा करना है? सोना, चांदी, धन, सब इकट्ठा कर रखा है जबकि परिग्रह तो करना ही नही है। धन संपदा इकट्ठा कर रखा है। इकट्ठा करना अपने पुण्य हैं। दिमाग से ज्ञान कोई ले सकता है, नहीं। बाकी सब कुछ आपसे यहीं ले लेंगे, ज्ञान नाही ले सकेंगे।
उन्होंने कहा कि जिनवाणी श्रवण से हम अपने आप में कितना बदलाव ला पाए हैं, यह भी देखना होगा। सिर्फ श्रोता ही हैं या श्रावक बने हैं। सुनकर रह गए तो श्रोता और कुछ प्राप्त कर अपने जीवन में बदलाव ला पाए तो श्रावक। प्रवचन से प्राप्त क्या किया उसकी कभी गिनती की। हम प्रभावना की गिनती कर सकते हैं, पैसे गिने जा सकते हैं लेकिन जो ज्ञान मिला कभी उस ओर ध्यान नही देते। 25 दिन से चातुर्मास चल रहा है। अगर इसमे कुछ प्राप्त किया तो परलोक सुधार रहे हैं अन्यथा सिर्फ समय खराब कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन इन दिनों प्रतिक्रमण करना ही चाहिए। और कभी करें या नही लेकिन कम से कम चातुर्मास काल में तो करना ही चाहिए। उपासरे में नाही आ सकें तो कोई नहीं, घर पर तो करें। अगर किसान वर्षा ऋतु से पूर्व अगर बीजारोपण नही करेगा और बारिश का जाएगी तो उसका तो साल खराब। ऐसे ही इस चातुर्मास काल में भी अगर बदलाव नही ला पाए तो सब बेकार है।
परिवार, मोह, माया, क्रोध, लोभ से जुड़ेःविपुलप्रभाश्री
