उदयपुर। सेक्टर 4 श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ श्री संयमलताजी म.सा.,डॉ श्री अमितप्रज्ञाजी म.सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म.सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म.सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासती संयमलता ने कहा कि झूठ बोलना, असत्य बोलना-पाप है। असत्य भयंकर दुःखदायक एवं अपयशकारी है। असत्य से वैर-विरोध बढ़ता है। झूठ दूसरे जीवों के लिए पीड़ाकारी होता है। झूठ का फल अशुभ होता है। असत्य का सेवन करने वाले के हृदय में शांति नही रहती, उसे अपना झूठ प्रकट होने का भय बना रहता है। झूठे व्यक्ति का कोई विश्वास नहीं करता। उसकी प्रतिष्ठा नहीं रहती। वह यहाँ भी दुःखी रहता है और परलोक में भी दुःखी होता है। उसको दुर्गति सुनिश्चित होती है। झूठ के पाप से दूसरे भव में उसे बोलने का यंत्र नहीं मिलता अर्थात गूँगा रहता है। ऐसा शास्त्रों में उल्लेख है।
साध्वी ने आगे कहा कि विश्व में सभी महापुरुषों ने असत्य बोलने को निन्दनीय बतलाया है, क्योंकि असत्य बोलने वाला सभी प्राणियों के लिए अविश्वसनीय बनता है अर्थात असत्यवादी का कोई विश्वास नही करता। इसलिए असत्य का सर्वथा त्याग करना चाहिए, सत्य को ही अपनाना चाहिए। सत्य ही मोक्ष का पहला द्वार है।
साध्वी अमितप्रज्ञा ने रविवार की चर्चा करते हुए बताया की सूर्य का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। सूर्य हमें उत्थान का मार्ग दर्शाता है। सूर्य सदैव परोपकार में तल्लीन है। इन्हें देखकर मानव को भी अपने प्राप्त साधनों का परोपकार में सदुपयोग ही करना चाहिए। दूसरों के हित के लिए अपने तन मन धन को लगाना परोपकार है। धर्मसभा में स्नेहा सिसोदिया ने ग्यारह उपवास के पच्चक्खाण ग्रहण किये और श्रीसंघ की ओर से उनका बहुमान हार, शॉल देकर किया गया।
असत्य भयंकर दुःखदायक एवं अपयशकारीःसाध्वी संयमलता
