डिजिटल तकनीकी को शिक्षक प्रषिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना होगा

उदयपुर। गोविन्द राम सेकसरिया जी के जन्म दिवस के उपलक्ष में विद्या भवन गो. से. शिक्षक महाविद्यालय में पैनल चर्चा का आयोजन हुआ। इस मौके पर सेकसरिया परिवार के सदस्य नंदकुमार उपस्थित थे उन्होंने सेकसरिया जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर चर्चा की शुरूआत की। पैनल में दीपक बी फाटक, कुणाल बघेला एवं अनुराग प्रियदर्षी थे।

आईआईटी मंुबई के प्रोफेसर एमेरेटस दीपक बी. फाटक ने कहा कि आने वाले समय में नई डीजिटल तकनीकी जीवन का अभिन्न अंग बनने वाली है। इसके लिए शिक्षक प्रषिक्षण कार्यक्रमों में इसको जोड़ना होगा। जिससे शिक्षक अपेक्षित भावि पीढ़ी को तैयार कर सके। इसी के साथ शिक्षण संस्थाओं में शिक्षक और विद्यार्थियों के संबंध की प्रगाढ़ता तथा प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमताओं पर विषेश ध्यान देना होगा। भावी पीढ़ी में नैतिकता का विकास करना आज की प्रमुख चुनौति है। इस दिषा में शिक्षण संस्थाओं को पहल करनी होगी। शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर आज की परिस्थिति की लेकर उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देष संपन्न होगा, प्रगति करेगा शिक्षा एवं स्वास्थ्य का भी सुधार होगा। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के समाजीकरण को जरूरी बताया।

दूसरे वक्ता आर्क गेट के फाउंडर एवं मुख्य संचालक कुणाल बघेला ने गोविन्दराम सेकसरिया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की विषेशताओं को बताते हुए उनके सादगीपूर्ण विलक्षण व्यक्तित्व, निर्णयक्षमता तथा भविश्योन्मुखी सोच को उनकी सफलता का रहस्य बताया। जो आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। उन्हांेने यह भी बताया कि सेकसरिया ने देश में कई शिक्षण संस्थाओं जिनमें विद्या भवन गोविन्दराम षिक्षक महाविद्यालय भी है के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी संस्थानों को बड़ी मात्रा में आर्थिक सहयोग प्रदान कर समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का आदर्ष उदाहरण प्रस्तुत किया।

विद्या भवन सोसायटी के मुख्य संचालक अनुराज प्रियदर्षी ने वहां उपस्थित शिक्षक विद्यार्थियों से कहा कि हमें गोविन्दराम सेकसरिया जी के विराट व्यक्तित्व से तीन चीजें महत्वपूर्ण चीजें सीखनी चाहिए पहला उनकी सोच हमेशा समय से आगे रहती थी, दूसरा उनकी रिस्क लेने की क्षमता और तीसरा उनकी नई चीजों को जानने की इच्छा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि वे स्कूलों में अच्छी शिक्षा दे सके यह गोविन्दराम जी ने उस समय देख लिया इसलिए उन्होंने मदद की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों उनकी प्राथमिकता थी। उनकी सोच थी कि जब तक महिलाओं को पुरूशों के बराबर शिक्षा नहीं मिलेगी समाज आगे नहीं बढ़ पाएगा।

इससे पूर्व प्रारंभ में अपने ऑनलाईन उद्बोधन में गोविन्दराम सेकसरियाजी पर लिखी पुस्तक के लेखक मेहनाज मर्चेंट ने गोविन्दराम सेकसरियाजी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व ही देश के विकास में वाणिज्य शिक्षा के महत्व का आकलन करते हुए वर्धा में देश के प्रथम कामर्स कॉलेज की स्थापना में महत्वपूर्ण आर्थिक योगदान दिया। मेहनाज ने बताया कि कॉटन किंग के रूप में उन्होंने अंत राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेश पहचान बनाई।

इस मौके पर भाषा विभाग की पुस्तक ‘सृजन‘ एवं डॉ. विद्या मेनारिया की पुस्तक ‘अंत राष्ट्रीय संबंध‘ का विमोचन भी हुआ।

प्रारंभ में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. फरजाना इरफान ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ. जयदेव पानेरी ने किया तथा धन्यवाद डॉ मुकेश  सुखवाल ने किया।

By Udaipurviews

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