उदयपुर, 4 अगस्त।देवेन्द्र धाम में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित प्रवचनमाला में पूज्य डॉ. राजेन्द्र मुनि ने सुख विपाक आगम में सुख का वर्णन विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वास्तविक सुख बाहरी भौतिक साधनों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ज्ञान में निहित है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य निरंतर सुख की तलाश में भौतिक संसाधनों का संग्रह करता रहता है, लेकिन यह सुख क्षणिक होता है। इच्छाओं और भोग-विलास की अंधी दौड़ व्यक्ति को तनाव, अशांति और अनेक मानसिक व शारीरिक समस्याओं की ओर ले जाती है। जब मनुष्य केवल बाहरी सुखों के पीछे भागता है, तब वह भीतर से रिक्त और असंतुष्ट होता जाता है।
डॉ. राजेन्द्र मुनि ने आगम ग्रंथों के माध्यम से सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की महत्ता बताते हुए कहा कि आत्मज्ञान से प्राप्त होने वाला संतोष ही जीवन की वास्तविक शांति का आधार है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन भी आवश्यक है, क्योंकि मन अशांत होने पर बाहरी सुख-सुविधाएं भी आनंद नहीं दे पातीं।
उन्होंने प्रवचन में कहा कि संसार और साधना के बीच संतुलन बनाकर आध्यात्मिक चिंतन को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। आत्मचिंतन, संयम और धर्म साधना से ही स्थायी सुख एवं मानसिक संतुलन प्राप्त किया जा सकता है। प्रवचन के अंत में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
कोठारी एवं बम्ब परिवार की ओर स्वागत अठाई तप की आराधना पर संघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन, महामंत्री हिम्मत बडाला, कोषाध्यक्ष दिनेश हिंगड़,दिनेश चैरडिया, रजनी डांगी, ममता रांका ने अभिनन्दन किया.
सुख विपाक आगम में सुख का वास्तविक स्वरूप का वर्णन , बाहरी नहीं आंतरिक शांति ही सच्चा आनंद:डॉ. राजेन्द्र मुनि
