उदयपुर, 17 मार्च। माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई), उदयपुर द्वारा सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सी.सी.आर.टी) में 13 मार्च से 17 मार्च 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय भित्ति चित्र एवं माण्डना कार्यशाला का समापन मंगलवार को संभागीय आयुक्त सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त सुश्री केवलरमानी ने कलाकारों का आह्वान किया कि वे अपनी कला को जीवंत बनाये रखें। उन्होंने कहा कि भित्ति चित्र विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कला स्वरूप व नाम से जाने जाते हैं किन्तु इनका मूल स्वरूप आदिवासी जीवन को दिग्दर्शित करना ही है। सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी ने संभागी कलाकारों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए टीआरआई निदेशक ओ.पी. जैन आदिवासी कलाओं के संरक्षण में टीआरआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इस तरह की कार्यशालाओं की महत्ता स्पष्ट की। श्री जैन ने कलाकारों द्वारा निर्मित कलाकृतियों की सराहना करते हुए भित्ति चित्रों को आदिवासी जीवन व प्रकृति की दर्पण बताया। सांख्यिकी निदेशक सुधीर दवे ने कार्यशाला प्रतिवेदन पेश करते हुए कहा कि उड़ीसा, त्रिपुरा, केरल, महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान के 41 कलाकारों व लाईजन अधिकारियों ने कार्यशाला में भाग लेकर 90 से अधिक कालजयी कलाकृतियां निर्मित की है। उन्होंने संभागी कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला को सफल बताया। कार्यशाला का संचालन श्री हर्षवदन सिंह सोलंकी, व्याख्याता ने किया।
संस्थान द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय राज्य स्तरीय मुखौटा कार्यशाला का समापन 18 मार्च 2026 को सीसीआरटी भवन परिसर में श्री लाईक हुसैन, निदेशक, भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर के आतिथ्य में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की पहल पर नई दिल्ली में सजी जनजाति कलाकारों की कृतियां
निदेशक ने जानकारी देते हुए बताया कि 16 मार्च 2026 को बेणेश्वर धाम में राजस्थान जनजातीय गौरव दिवस समारोह के अवसर पर लगायी गयी प्रदर्शनी में माननीय मुख्यमंत्री राजस्थान श्री भजन लाल शर्मा ने आदिवासी कलाकृतियों की सराहना की। माननीय मुख्यमंत्री ने इन कलाकृतियों एवं मुखौटा कार्यशाला में निर्मित काष्ठ कला कलाकृतियों को राजस्थान दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में बीकानेर हाउस में लगायी गयी प्रदर्शनी में भी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जिसकी पालना में संस्थान के सहायक निदेशक बनवारी लाल बुम्बरिया के नेतृत्व में 2 कलाकार प्रदर्शनी लगाने हेतु नई दिल्ली पहुंच गये हैं तथा 18 मार्च से आदिवासी कलाकृतियां भी उक्त प्रदर्शनी में प्रदर्शित हो रही हैं।
